इथोपिया में खेती के हुनर दिखाएंगे भारतीय
नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। पूर्वी अफ्रीकी देश इथोपिया ने भारतीय किसानों की कुश¶ता और अनुभव के च¶ते उन्हें व्यावसायिक खेती के ¶िए इथोपिया आने का निमंत्नण दिया है और 18 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की पेशकश की है।
पेश की जा रही भूमि का आकार भारतीय राज्य पंजाब की कुल कृषि भूमि के आधे हिस्से के बराबर है।
भारत दौरे पर आए इथोपिया के कृषि मंत्री तफेरा डरबेव ने कहा कि अभी तक इथोपिया ने देशी और विदेशी निवेशकों को 3,07,000 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की है। इसमें से 79 फीसदी भूमि भारतीय निवेशकों को दी गई है। यह भूमि 70 वर्षो के लीज पर दी गई है।
तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आए तफेरा डरबेव ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि अब वे 36 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि निवेशकों को देने की योजना बना रहे हैं, जिसका आधा हिस्सा यानी 18 लाख हेक्टेयर भारतीय निवेशकों को दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक यदि और अधिक भूमि लेना चाहेंगे तो उन्हें खुशी होगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशकों ने अब तक 4.7 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। निवेश में तेजी से वृद्धि होगी, क्योंकि खनन क्षेत्र में निवेशक रुचि ले रहे हैं।
भारतीय निवेशक यहां कपास, ताड़ का तेल, तिलहन, रबर और बागवानी में निवेश करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि एक भारतीय कम्पनी कारुत्री ग्लोबल गóो की खेती के लिए 1,00,000 हेक्टेयर भूमि लेने की प्रक्रिया में है। वह वहां 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर सकती है। भारत गóो की खेती में विशेषज्ञता रखता है। वे भारतीय कम्पनियों से बात कर रहे हैं कि वे इथोपिया में भी गन्ना उद्योग का विकास करें।
इससे पहले डरबेव ने मंगलवार को उपभोक्ता माम¶े तथा सार्वजनिक वितरण विभाग के राज्य मंत्नी प्रोफेसर के.वी. थॉमस से मु¶ाकात के दौरान कहा था कि भारतीय किसान इथोपिया में व्यवसायिक खेती के ¶िए सुरक्षित भूमि का फायदा उठाकर भारत को निर्यात की जाने वा¶े दा¶ों और ति¶हन की फस¶ें पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा था कि उनका देश न केव¶ मशीनी खेती बल्कि ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था के क्षेत्न में भी भारत के अनुभवों का फायदा उठाना चाहता है ।
इथोपिया की सरकार के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए थॉमस ने इथोपिया के मंत्नी से अनुरोध किया था कि इथोपिया में व्यावसायिक खेती के ¶िए भारतीय उद्यमियों के विभिन्न प्रकार की मंजूरियां एक ही कार्या¶य से उप¶ब्ध कराये जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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