अधिकारियों पर आरोप लगाना आम बात : थॉमस
नई दिल्ली। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पी.जे.थॉमस ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि यह आम बात है कि अपने सरकारी दायित्वों के निर्वहन करने वाले अधिकारियों को ऐसे मामलों में फंसा दिया जाता है जो 'राजनीति से प्रेरित' होते हैं।
न्यायालय में मंगलवार को अपने अतिरिक्त हलफनामे में थॉमस ने कहा, "अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करने वाले अधिकारियों के लिए उनके खिलाफ मामले होना आम बात है। इनमें से ज्यादातर मामले बाजी जीतने के लिए अथवा राजनीतिक रूप से प्रेरित होते हैं।"
थॉमस ने यह हलफनामा, गैर सरकारी संगठन 'सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन' की ओर से दायर एक याचिका पर अदालत द्वारा जारी नोटिस के जवाब में दाखिल किया है। याचिका में इस आधार पर थॉमस की सीवीसी पद पर नियुक्ति को चुनौती दी गई है कि उनके खिलाफ ताड़ तेल आयात मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया है और केरल सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी है।
थॉमस ने कहा कि वह अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जिसे 2008 में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने क्लीन चिट दिया था। उन्होंने कहा कि उस वर्ष कई अन्य नौकरशाहों को भी सीवीसी द्वारा क्लीन चिट दिया गया था।
मामलों का ब्योरा देते हुए थॉमस ने कहा, " इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि विचार के क्षेत्र में रखा गया लगभग प्रत्येक अधिकारी के खिलाफ शिकायतें थीं अथवा आरोप पत्र लंबित था, लेकिन यह सीवीसी है जो पूरे मामले को देखने के साथ ही निर्णय करता है कि अधिकारी को नियुक्ति के लिए हरी झंडी देनी है अथवा नहीं।"
अपने हलफनामे में थॉमस ने कहा कि पिछले 37 वर्षो का सेवा का उनका बेदाग रिकार्ड है, और इसके बावजूद उन्हें अब एक दागी अधिकारी बताया जा रहा है। हलफनामे में थॉमस ने कहा, "मेरे मामले को इस तरह से रखा गया कि वह कुछ खास है और दागी नाम के साथ संघर्ष करने वाला मैं अकेला हूं।"
अपने हलफनामे में थॉमस ने मीडिया की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनकी छवि खराब की है क्योंकि उन्होंने अपनी नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर उनसे बात नहीं की।
उन्होंने कहा, " इस मामले में मेरा बचाव का पक्ष रखने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया मेरे पास पहुंचे थे लेकिन मैंने उनके सामने अपना पक्ष रखने से इंकार किया। मैंने निर्णय लिया था कि मैं अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखूंगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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