पोलियो उन्मूलन के लिए सामने आए मौलवी
मेरठ, 28 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मौलवी शुभकमाना पत्रों और मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर के जरिए पोलियो की रोकथाम के लिए लोगों को जागरुक और प्रेरित कर रहे हैं।
इन धार्मिक नेताओं की कोशिश अब रंग ला रही है। वर्ष 2006 में 1,700 परिवारों ने पोलियो रोधी दवा की दो बूंद अपने बच्चों को पिलाने का विरोध किया था जबकि पिछले साल केवल 126 परिवारों ने बच्चों को दवा देने से मना किया।
इस साल 23 जनवरी को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (एनआईडी) से पहले ही मुजफ्फरनगर और मेरठ जिले के मुख्य मौलवी 'शहर काजी' ने व्यक्तिगत तौर पर 50,000 से ज्यादा अपील पत्र जारी कर मुस्लिम समुदाय को पांच साल से कम उम्र के अपने बच्चों को पोलियो बूथ तक ले जाने का आग्रह किया था।
पिछले साल ईद के दौरान मेरठ के मुख्य मौलवी ने शुभकामना पत्र वितरित किए थे जिन पर लिखा था 'अच्छा स्वास्थ्य, सच्चे सुख की कुंजी है' । साथ ही उन्होंने बच्चों को पोलियो की बीमारी से बचाने के लिए दवा पिलाने की अपील की थी।
यहां प्रत्येक पोलियो टीकाकरण दिवस यानी रविवार से पहले शहर की सभी मस्जिदों में लाउडस्पीकर के जरिए नियमित नमाज के बाद लोगों से बच्चों को दवा की दो बूंद पिलाने को कहा जाता है।
मक्का की यात्रा से लौटने वाले मुख्य मौलवियों और हाजियों ने कई स्थानों पर पोलिया टीकाकरण बूथ के उद्घाटन किए।
मेरठ शहर के काजी जैनस साजीदीन ने आईएएनएस को बताया, "हम अपने समुदाय के लोगों और हाजियों के साथ बाचीत कर रहे हैं कि मक्का जाने वाले भारतीय और पाकिस्तानियों को दवा की दो बूंद लेना अनिवार्य कर देना चाहिए। इससे उन पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।"
साजीदीन के अनुसार शहर के हालात में पिछले कुछ वर्षो के मुकाबले अब भारी बदलाव है। पहले लोग यह कहते हुए दवा पिलाने का विरोध करते थे कि उनका बच्चा नपुंसक हो जाएगा।
मुजफ्फरनगर शहर के काजी जहीर आलम ने कहा, "हमने अपने घरों में पोलियो बूथ खोलने का फैसला किया और लोगों के सामने उदाहरण पेश करने के लिए सबसे पहले अपने ही बच्चे को दवा दी। अब लोगों को एहसास होने लगा है कि दवा उनके बच्चों की भलाई के लिए है लेकिन अभी भी कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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