'देवबंद का माहौल ख़राब, इसलिए दे रहा हूं इस्तीफा'

Darul Uloom

देवबंद को इस्लामिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. पिछले दिनों अपने बयानों की वजह से विवादों में आए देवबंद के मोहतमिम यानी कुलपति मौलाना ग़ुलाम मोहम्मद वास्तनवी ने इस्तीफ़ा देने का मन बना लिया है.

उन्होंने कहा है कि देवबंद के शासी निकाय मजलिस-ए-शूरा की बैठक बुलाई है और 20 फ़रवरी को होने वाली इस बैठक में वे अपना इस्तीफ़ा दे देंगे. बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से देवबंद का माहौल ख़राब हो इसलिए वे इस्तीफ़ा दे रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि उन्होंने कथित रुप से गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकारी की तारीफ़ कर दी थी इसके बाद उनके ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय से विरोध शुरु हो गया था. हालांकि उन्होंने सारे हंगामे के लिए मीडिया को दोषी ठहराते हुए कहा है कि मीडिया ने उनके बयान को ग़लत ढंग से पेश किया था और उन्होंने मोदी को कभी क्लीन चिट नहीं दी थी.

ये पूछे जाने पर कि उन्होंने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला क्यों किया, उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता मेरे मसले की वजह से हंगामा बढ़ जाए, दारुल उलूम में उखाड़-पछाड़ बढ़ जाए और शिक्षण का काम प्रभावित हो जाए. इसलिए मैंने दारुल उलूम के हित में इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है."

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि गुजरात में हुए दंगों के संदर्भ में नरेंद्र मोदी को उन्होंने कभी क्लीन चिट नहीं दी थी और अंग्रेज़ी के अख़बार में यह ख़बर भी प्रकाशित हो चुकी है लेकिन उर्दू मीडिया यह प्रचार बंद ही नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा, "यह गड़बड़ी मेरी तरफ़ से नहीं मीडिया की तरफ़ से है. जो कुछ किया मीडिया ने किया."

यह पूछे जाने पर कि मजलिस-ए-शूरा में उनके इस्तीफ़े के बाद क्या होगा, वस्तानवी ने कहा, "यह मजलिस-ए-शूरा पर ही निर्भर करेगा कि वह मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार करे या न करे. यदि वे इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं करेंगे तो फिर मैं विचार करूँगा कि मुझे क्या करना चाहिए." उनका कहना था, "क्या होगा, यह तो वक़्त ही बताएगा."

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2002 के दंगों के सिलसिले में कथित रुप से क्लीचिट देने के कारण देवबंद के छात्रों ने उनकी कक्षा का बहिष्कार करने के बाद परिसर में तोड़फोड़ मचाई थी. वस्तानवी का विरोध कर रहे छात्रों ने 'मोदीनवाज मोहतमिम वापस जाओ" का नारा लगाते हुए 24 जनवरी को धरना दिया था.

इस घटना के बाद दारूल उलूम ने भी सख्ती बरतते हुए सोमवार को नौ छात्रों को निलंबित कर दिया था. उनका विरोध कर रहे छात्रों की मांग है कि वस्तानवी दारुल उलूम छोड़कर वापस जाएं. छात्रों का एक धड़ा हालांकि उनके समर्थन में भी उतर आया है. स्तानवी को पिछले दस जनवरी को ही दारुल उलूम का मोहतमिम यानी कुलपति नियुक्त किया गया था.

उनकी नियुक्ति के बाद कहा जा रहा था कि एमबीए कर चुके वास्तनवी आधुनिक शिक्षा के पक्षधर रहे हैं और इससे देवबंद में काफ़ी बदलाव देखने को मिल सकता है. लेकिन इसके ठीक बाद ये विवाद खड़ा हो गया.

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