7 महीने में 8 बार बढ़े पैट्रोल के दाम

नई दिल्ली। जहां सब्जियों के बढ़े दामों ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है वहीं मध्यरात्रि से बढ़े पैट्रोल के दाम ने आम आदमी को गुस्साने और खीझने का एक और मौका दे दिया। सरकार का क्या है वो हर महीने पैट्रोल के दाम बढ़ा देती है जिसका खामियाजा आम जनता सिसक-सिसक कर भुगतने को मजबूर है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल के दाम को नियंत्रणमुक्त करने का निर्णय जून 2010 में लिया था। इसके बाद से अब तक 8 बार पेट्रोल के दाम बढ़ चुके हैं। इसके चलते महज 7 महीनों में पेट्रोल के दाम 8 बार यानी 13.48 रूपए बढ़ गए।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों के मददेनजर देश में पेट्रोल का विपणन और वितरण करने वाली तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार मध्यरात्रि से पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद दिल्ली में आज मध्यरात्रि से पेट्रोल दाम 2.55 रूपए प्रति लीटर तक बढ़ गए। इंडिया आयल लिमिटेड ने पेट्रोल कीमतों में 2.50 रूपए, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने 2.54 रूपए और भारत पेट्रोलियम ने 2.55 रूपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। तेल वितरण कंपनियों ने एक महीने के भीतर ये दूसरी बार पेट्रोल के दाम बढाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में कच्चे तेल के दाम 98 डालर प्रति बैरल के आस पास मंडरा रहे हैं। इससे तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम बढ़ाने के बाध्य होना पड़ा है। प्याज व अन्य सब्जियों के आसमान छूते दामों ने आम आदमी की कमर वैसे ही तोड़कर रख दी है। ऎसे में पेट्रोल फिर महंगा होने से उसकी जेब और ढीली होगी। आदमी की उम्र हर साल बढ़ती है, साल में एक बार त्यौहार आते है लेकिन पैट्रोल हर महीने बढ़ता है। कहना गलत ना होगा कि आज आदमी से महंगा रोजमर्रा की जरूरत वाले चीजें हैं।

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