अनाज पर कानूनन हक सबका नहीं?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद, राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के खाद्य सुरक्षा की महात्वाकांक्षी योजना पर पूरी तरह से असहमत है। मालूम हो कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी राष्ट्रीय सलाहकार समिति की अध्यक्षा हैं।

प्रधानमंत्री की आर्थिक परिषद के मुताबिक, भारत की 75 प्रतिशत आबादी को कानूनी तौर पर रियायती अनाज नहीं दिया जा सकता। परिषद के मुताबिक भारत की अधिकांश जनता को यह हक दे पाना बेहद मुश्किल है। गुरुवार को परिषद ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश की।

परिषद ने अपनी सिफारिश में कहा कि वास्तविक रूप में गरीब लोगों को सरकार सिर्फ 2 रुपये प्रतिकिलो गेहूं और 3 रुपये प्रतिकिलो चावल ही मुहैया करा सकती है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने 'वरीयता प्राप्त' और 'आम' परिवारों को रियायती दर पर अनाज वितरित करने की सिफारिश की थी। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "एनएसी की सिफारिशों को लागू नहीं किया जा सकता।"

सी. रंगराजन की अध्यक्षता वाली परिषद ने कहा कि सिर्फ प्राथमिक परिवारों को ही अनाज पर कानूनन हक दिया जा सकता है। प्रस्तावित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक में 46 फीसदी ग्रामीण परिवारों और 28 फीसदी शहरी परिवारों को ही प्राथमिक परिवार माना गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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