अक्षरधाम मंदिर को लेकर सवाल

नदियों के तटबंधों को बचाने के लिए किए गए प्रयासों के बारे में पत्रकारों से बातचीत में जयराम रमेश का कहना था, ''अगर आप ये सवाल पूछेगें कि क्या खेल गांव को पर्यावरण की मंजूरी मिली है तो मेरा जवाब होगा हाँ. लेकिन क्या उसे ये मंजूरी मिलनी चाहिए तो मेरा मानना है कि उसे पर्यावरण की मंज़ूरी नहीं मिलनी चाहिए थी.''इसी तरह से अक्षरधाम मंदिर पर उन्होंने कहा, ''अक्षरधाम को पर्यावरण की मंज़ूरी नहीं मिली क्योंकि उसने इसके लिए कोई अर्ज़ी नहीं डाली थी.''
जयराम रमेश पर्यावरण नियमों पर सख़्ती को लेकर चर्चा में रहे हैंजब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछा कि क्या 30 एकड़ में फैले अक्षरधाम मंदिर के निर्माण में पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उनका जवाब था कि ये तो पहले ही हो चुका है.मंत्री का कहना था हम न ही खेल गांव और न ही अक्षरधाम मंदिर के परिसर को गिरा सकते है. लेकिन हमें बाक़ी नदियों के किनारों को बचाना होगा.
अक्षरधाम मंदिर का जब से निर्माण हुआ है तभी से पर्यावरण के मसले पर वह विवादों में रहा है.अक्षरधाम मंदिर को इसका 'पहला अपराधी' मानते हुए उनका कहना था कई और ऐसे ही निर्माण हुए हैं.रमेश का कहना था कि वे नदियों के तटबंधो के विनियमन को लेकर अधिसूचना लाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.खेल गांव का निर्माण राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान खिलाड़ियों को ठहराने के लिए किया गया था.2010 में राजधानी दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल हुए थे.अक्षरधाम मंदिर और खेल गांव दोनों का निर्माण यमुना नदी के किनारों पर हुआ है.उधर कांग्रेस ने इस विचार से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उनका जयराम रमेश के वक्तव्य से कोई लेना देना नहीं है.












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