नवरत्न कंपनियों की तर्ज पर अब नवरत्न विश्वविद्यालय
सिब्बल ने कहा, "हमें फिलहाल एक शुरुआत की जरूरत है। विश्वविद्यालयी प्रणाली में लचीलापन और स्वायत्तता लाने के लिए एक आचार संहिता बनाने की हमारी योजना है, जो प्रारम्भ में केंद्रीय विश्वविद्यालों के लिए होगी, और बाद में शायद राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों और अन्य के लिए भी।" सिब्बल ने कहा कि आचार संहिता का उद्देश्य आत्म-नियमन के जरिए जवाबदेही के साथ ही क्षमता, पारदर्शिता और स्वायत्तता विकसित करना है। सिब्बल के पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार भी है।
उच्च शिक्षा के नए प्रतिमान पर जोर देते हुए सिब्बल ने कहा, "हमें ऐसे अध्येता तैयार करने हैं जो ज्ञान पैदा करने में भी योगदान करें, न कि वे सिर्फ ज्ञान अर्जित करें। इससे न केवल मानव पूंजी तैयार होगी, बल्कि सामाजिक पूंजी भी खड़ी होगी, जो हमारे युवकों को वश्विक स्तर पर काम करने और प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगी। इसलिए यह हमारे लिए चुनौती है।"
सिब्बल ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए उनका मंत्रालय नवरत्न विश्वविद्यालय या इंडियन आईवी लीग के सिद्धांत पर काम कर रहा है। सिब्बल के अनुसार केंद्र सरकार ने 2020 तक उच्च शिक्षा में नामांकन का अनुपात दोगुना बढ़ाकर कम से कम 30 प्रतिशत पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। सिब्बल ने यह भी कहा कि उनका मंत्रालय उच्च शिक्षा के नियमन के लिए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान आयोग (एनसीएचईआर) के गठन की भी योजना बना रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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