उड़ीसा के कंधमाल दंगा मामले में 9 को सजा
हिंसा के दौरान दर्जनों घर जला दिए गए। कई दिनों तक चली हिंसा में कम से कम 38 लोगों की मौत भी हुई थी। इन मामलों की सुनवाई त्वरित अदालत में चल रही थी। इस मामले में 3 लोगों को पर्याप्त सबूत न होने के कारण रिहा कर दिया गया। 2008 में राजधानी भुवनेश्वर से 200 किमी दूर कंधमाल में हुए दंगों के बाद 25 हजार से ज्यादा ईसाई अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए थे।
बचाव पक्ष के वकील अजीत पटनायक के मुताबिक सोमवार को जिन 9 लोगों को सजा मिली है। वो लोग सुमारबंधा और दबंगपदार गांवों में हुई हिंसा के लिए दोषी साबित हुए हैं। न्यायाधीश सोभान कुमार दास ने दोषियों को 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम न देने की स्थिति में कारावास की सजा 1 साल और बढ़ जाएगी।
हिंदूवादी संगठनों का आरोप था कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या ईसाई संगठनों की मिलीभगत से हुई। जबकि स्थानीय पुलिस सरस्वती की हत्या के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहराती रही है। राज्य सरकार ने दंगों से जुड़े मामलों की जांच के लिए कंधमाल जिले में त्वरित अदालतों का गठन किया था।













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