तेलंगाना के लिए अभूतपूर्व शक्ति-प्रदर्शन

तेलंगाना राष्ट्र समिति की यह "तेलंगाना महागर्जना" रैली वारंगल नगर में हुई.इससे पहले राज्य के इतिहास में लोगों का इतना बड़ा जमावड़ा कभी भी देखने को नहीं मिला था.तेलंगाना राष्ट्र समिति ने यह रैली गृह मंत्री पी चिदंबरम के उस वक्तव्य की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित की जिसमें उन्होंने गत वर्ष नौ दिसंबर को घोषणा की थी कि तेलंगाना राज्य की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
रैली में तेलंगाना के हर वर्ग और कार्यक्षेत्र के लोग और तमाम संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे.इसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें केंद्र से कहा गया कि वो किसी विलंब के बिना तेलंगाना का बिल संसद के आने वाले अधिवेशन में पेश करे.टीआरएस के अध्यक्ष और सांसद के चन्द्रशेखर राव ने कहा, ''गत 54 वर्ष से हर किसी ने तेलंगाना के लोगों के संयम को आज़माया है लेकिन अगर यह सिलसिला आगे जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे.''
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने संसद में बिल नहीं लाया तो पहले सत्याग्रह शुरू किया जाएगा और असहयोग द्वारा प्रशासन को स्थागित कर दिया जाएगा.और अगर उसके बाद भी केंद्र ने बात नहीं मानी तो फिर उसे तेलंगाना के लोगों का आक्रोश झेलना पड़ेगा.तेलंगाना सरकारी कर्मचारियों के संगठन ने कहा कि अगर चन्द्रशेखर राव आह्वान करते हैं तो तेलंगाना के तमाम दो लाख सरकारी कर्मचारी काम रोक देंगे.
रैली में ओस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों और स्वामी अग्निवेश ने भी हिस्सा लिया.चन्द्रसेखर राव ने कहा की तेलंगाना गत वर्ष ही बन जाता अगर आंध्र और रायल सीमा के नेता षडयंत्र नहीं रचते और कांग्रेस और तेलुगु देशम धोखा नहीं देते.चन्द्रसेखर राव ने जिस तरह के कड़े शब्दों का प्रयोग किया है इससे स्पष्ट था कि वो अब केंद्र सरकार के साथ दो-दो हाथ करने की तैयारी में हैं और आने वाले दिन आन्ध्र प्रदेश के लिए और भी कड़े सिद्ध हो सकते हैं.
टीआरएस ने यह शक्ति-प्रदर्शन एक ऐसे समय पर किया है जबकि इस विषय पर केंद्र सरकार द्वारा गठित की हुई श्रीकृष्ण समिति की अवधि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है.जस्टिस श्रीकृष्ण ने गुरूवार को ही हैदराबाद में अपने अंतिम दौरे के अवसर पर कहा कि दो सप्ताह के भीतर उनकी समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को पेश कर देगी. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में केवल आंध्र प्रदेश की स्थिति की जानकारी ही नहीं दी जाएगी बल्कि समिति कुछ सिफ़ारिशें भी करेगी.लेकिन इस बात के कोई संकेत नहीं है कि पांच सदस्यों वाली इस समिति क्या एक अलग तेलंगाना राज्य की स्थापना का समर्थन करेगी या आंध्र प्रदेश को संगठित रखने की बात कहेगी.












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