भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण यान की क्षमता बढ़ी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मानक के अनुसार प्रक्षेपण के समय जीएसएलवी की ऊंचाई 49 मीटर और भार 414 टन होता है।

सोमवार को उपग्रह जीसैट-5पी को लेकर अंतरिक्ष में जाने वाला यान 51 मीटर ऊंचा और 418 टन भारी होगा।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक पी. एस. वीराराघवन ने आईएएनएस से कहा कि इस बार यान में अधिक क्रायोजेनिक ईंधन डाला जाएगा और उड़ान भरने की क्षमता भी बढ़ाई गई है। इस बार यान पहले से अधिक भारी 2,310 किलोग्राम भार के उपग्रह को लेकर जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जीएसएलवी की भार ढोने की क्षमता पिछले कई सालों में निरंतर बढ़ती गई है। यान 2001 में 1,530 किलाग्राम भार के उपग्रह जीसैट-1 को लेकर अंतरिक्ष में गया था। वहीं अप्रैल 2010 में यह 2,220 किलोग्राम भार के जीसैट-4 को लेकर गया था।

नया उपग्रह 2,310 किलोग्राम भारी है। इसमें 36 ट्रांसपोंडर लगे हैं। प्रक्षेपण के सफल रहने पर पृथ्वी की कक्षा में इसरो के ट्रांसपोंडरों की कुल संख्या बढ़कर 235 हो जाएगी।

यह दूरसंचार उपग्रह 1999 में भेजे गए उपग्रह का स्थान लेगा और इसके जरिये संचार, टेलीविजन और मौसम की भविष्यवाणी की सुविधाएं सतत मिलती रहेंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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