बिहार : पोलियो के 9 नए मामले
पटना। बिहार में पिछले वर्ष पोलियो के जहां 117 मामले प्रकाश में आए थे वहीं इस साल अब तक मात्र नौ मामले ही सामने आए हैं। इनमें पी-3 प्रकार के पोलियो के छह मामले हैं।इस बीच राज्य के सात जिलों में 19 दिसम्बर से 'बाइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (एमओपीवी)-1' कार्यक्रम के तहत बच्चों को पोलियो की दवा की खुराक देने के लिए 'मॉकअप' चक्र चलाया जाएगा।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालन निदेशक संजय कुमार ने आईएएनएस को बताया कि राज्य में पिछले वर्ष पोलियो के 117 मामले सामने आए थे जबकि इस साल यह संख्या घटकर नौ पर पहुंच गई है।उन्होंने बताया कि इस साल के नौ मामलों में पी-3 के छह मामले जनवरी में समस्तीपुर और बेगूसराय जिले में पता चले थे। इसके बाद एमओपीवी ने देश में पहली बार पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाया।
इस कार्यक्रम के पश्चात राज्य में अब तक पी-3 का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि राज्य में पी-1 प्रकार के पोलियो के तीन मामले पता चले, नेपाल के सीमावर्ती पूर्वी चम्पारण के ढाका प्रखण्ड में इनका पता चला।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने देशभर के 107 प्रखण्डों की पोलियो वायरस में मामले में 'हाईरिस्क जोन' के रूप में पहचान की है जिनमें से 41 प्रखण्ड बिहार के कोसी क्षेत्र के हैं।
पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े लोगों का मानना है कि देश में पोलियो वायरस के संक्रमण की प्रमुख वजह प्रवासी और घुमंतू आबादी के लोग हैं। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 5,762 ईंट भट्ठे हैं जिनमें काम करने के लिए हर साल मजदूर अन्य प्रदेशों से आते-जाते हैं। सरकार इन पर खास ध्यान दे रही है।
राज्य स्वास्थ्य समिति से सम्बद्ध डॉ़ उत्पलकांत ने बताया कि 19 दिसम्बर से राज्य के पटना, बेगूसराय, दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया, सहरसा और मधेपुरा में एमओपीवी-1 वैक्सिन द्वारा 'मॉकअप' चक्र चलाया जायेगा। इस दौरान 13000 टीकाकर्मी लगभग 13 लाख घरों का भ्रमण कर लगभग 48 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक देंगे।
गौरतलब है कि विश्व के चार देशों भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नाइजीरिया में पोलियो का पूरी तरह से उन्मूलन नहीं हो सका है। जानकारों का कहना है कि इस वर्ष पोलियो उन्मूलन अभियान के काफी सार्थक नतीजे सामने आए हैं और अगले दो वषरें में बिहार पोलियो मुक्त राज्य बन जाएगा।












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