एसयूवी बाजार में रमेश के विचारों का कद्रदान नहीं
नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश भले ही डीजल पर चलने वाले स्पोर्ट युटिलिटी वेहिकल (एसयूवी) को चलाने का अपराध मानते हों, लेकिन एसयूवी की बिक्री की बढ़ती रफ्तार और इस वाहन के प्रति लोगों के नजरिए को देखते हुए कहा जा सकता है कि इन वाहनों को सड़क से हटाना कोई आसान काम नहीं होगा।
क्या नेता और क्या कारोबारी, अमीर और ताकतवर लोगों में आम कारों की अपेक्षा एसयूवी के प्रति दिलचस्पी अधिक दिखाई पड़ती है।
एसयूवी में साधारण कारों की तुलना में अधिक जगह होती है और इन्हें खराब सड़कों पर भी आसानी से चलाया जा सकता है।
कारोबारी रणजीत राणा ने कहा कि दिल्ली जैसे शहरों में ऑटो रिक्शा और मोटरसाइकिल चलाने वालों को डराने के लिए एसयूवी बिल्कुल सही गाड़ी है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि गाड़ी के बड़ी होने से आपको सड़क पर सम्मान मिलता है। यहां तक कि ट्रक और बस भी आपके साथ गुस्ताखी करने की हिमाकत नहीं करते हैं। इसलिए उन्होंने पुरानी टाटा सफारी को हटाकर पिछले महीने टाटा फॉर्च्यूनर खरीदी।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्च र्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कारोबारी साल में एसयूवी की बिक्री में 20.88 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस साल कुल 2,72,733 एसयूवी गाड़ियां बिकी थीं।
रमेश कहते हैं कि एसयूवी को डीजल से चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि डीजल पर सब्सिडी दी जाती है और ये गाड़ियां प्रदूषण फैलाती हैं। उधर उनकी ही कांग्रेस पार्टी ने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को 39 बोलेरो एसयूवी बांटे थे।
कांग्रेस ने 2007 में गुजरात विधानसभा चुनाव में 300 डीजल से चलने वाली टोयोटा इनोवा किराये पर ली थी और इसके लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया था।
रमेश की राय से विपरीत सियाम के अधिकारियों ने आईएएनएस से कहा कि भारत में बिकने वाले एसयूवी को खास तौर से भारत की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह अधिक डीजल नहीं पीती है, बल्कि किफायती है।
पिछले तीन सालों से टोयोटा इनोवा चला रहे 25 वर्षीय कुणाल नायर ने कहा कि डीजल कारों की कीमत पेट्रोल कारों से अधिक होती है और अधिक कीमत की भरपाई करने में चार से पांच साल लग जाते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में 1.4 करोड़ कारें हैं और इनमें से 30 लाख एसयूवी हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर भारत में एसयूवी बनाने वाली प्रमुख कम्पनियां हैं।
फोर्ड इंडीवर चलाने वाले 25 वर्षीय सिद्धार्थ जैन ने कहा कि डीजल प्रौद्योगिकी में काफी विकास हुआ है और यह अब प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन नहीं रहा है।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ टुटु धवन ने कहा कि मंत्री को आंकड़ों पर गौर करना चाहिए। एसयूवी की संख्या दो-तीन फीसदी से अधिक नहीं है। टैक्सी और व्यावसायिक वाहन भी डीजल पर चलते हैं। क्यों न उन्हें भी बंद कर दिया जाए।
पर्यावरण कार्यकर्ता हालांकि रमेश के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि एसयूवी ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लए खतरा है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉरमेंट की वरिष्ठ अधिकारी अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि डीजल कारें कई प्रदूषणकारी तत्वों और नाइट्रोजन ऑक्साइड का पेट्रोल कारों की तुलना में बहुत अधिक उत्सर्जन करती हैं, जो भारतीय शहरों के लिए एक समस्या है।
चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाद भारत ग्रीन हाउस गैसों का सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाला चौथा देश है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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