विकिलीक्स खुलासा : कट्टरपंथी हिंदू संगठन भारत के लिए ज्यादा खतरनाक
लंदन। विकिलीक्स द्वारा जारी किए गए गोपनीय राजनयिक संदेशों के अनुसार कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पिछले वर्ष भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे. रोमर से कहा था कि कट्टरपंथी हिंदू संगठनों का अभ्युदय भारत के लिए, कुछ इस्लामी आतंकी संगठनों को मुस्लिम समुदाय से मिल रहे समर्थन से कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है।
समाचार पत्र 'गार्जियन' ने शुक्रवार को कहा है कि राहुल ने रोमर से कहा था कि यद्यपि आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा को भारतीय मुस्लिम समुदाय के कुछ खास तत्वों का समर्थन होने के प्रमाण हैं, लेकिन चरमपंथी हिंदू संगठनों का अभ्युदय ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ये हिंदू संगठन धार्मिक तनाव और मुस्लिम समुदाय के साथ राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा करते हैं।
अखबार के अनुसार राहुल ने रोमर से कहा था कि घरेलू स्तर पर तैयार हुए उग्रवादी मोर्चे के कारण पाकिस्तान या भारत के इस्लामी समूहों की ओर से प्रतिक्रियास्वरूप आतंकी हमले किए जा रहे हैं और यह खतरा चिंता का एक विषय है। इस पर बरारबर ध्यान रखे जाने की जरूरत हो गई है।
वर्ष 2007 में अमेरिकी राजनयिकों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी के बारे में बताया था कि उन्हें व्यापक तौर पर कोरे कागज के रूप में देखा जाता है और उन्हें उन लोगों की धारणाओं को गलत साबित करना होगा, जो उन्हें हल्के में लेते हैं।
एक राजनयिक ने एक संदेश में कहा था, "ऐसा करने के लिए उन्हें दृढ़ संकल्प, गम्भीरता, प्रेम और सहनशीलता दिखानी होगी। उन्हें भारतीय राजनीति के गंदे और निर्दयी कार्य-व्यापार में अपने हाथ गंदे करने होंगे।" राजनयिक ने ये बातें "द सन ऑलसो राइजेज : राहुल गांधी टेक्स एन अदर स्टेप टूवार्ड्स टॉप जॉब" र्शीर्षक वाले एक संदेश में कही है।
एक अन्य संदेश में राहुल की राजनीतिक अनुभवहीनता और गलतियों के बारे में बात की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों और पत्रकारों ने भी उनकी आलोचना की है। लेकिन एक संदेश में कहा गया है कि राहुल, अमेरिका को और अमेरिका, राहुल को प्रिय है।
पिछली गर्मी में एक अन्य अमेरिकी अधिकारी के साथ मुलाकात में राहुल ने ग्रामीण आबादी और छोटे कस्बों पर ध्यान केंद्रित करने की अपनी रणनीति के बारे में बताया था। इससे अमेरिकी अधिकारी काफी प्रभावित हुआ था।
अधिकारी ने कहा, "राहुल एक ऐसे अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं, जिन्हें पता होता है कि दूसरे के पास गया उनका संदेश कितना सटीक और मुखर था तथा उसने कितना असर छोड़ा।"
पिछले वर्ष नवम्बर में रोमर से मुलाकात के बाद वाशिंगटन भेजे गए एक संदेश में राहुल के बारे में कहा गया था कि "अतीत में उनसे सम्पर्क कर पाना कठिन था, लेकिन अब वह खुद अमेरिकी सरकार के साथ सम्पर्क के लिए उत्सुक हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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