फोन टेपिंग पर प्रधानमंत्री ने मांगी रिपोर्ट, आडवाणी ने साधा निशाना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि वह फोन टेपिंग के मामले को लेकर उद्योग जगत में पैदा हुई घबराहट से वाकिफ हैं लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टेप की गई ऐसी बातचीत को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम की जरूरत है।उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस मामले में प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि फोन टेपिंग मामले से ऐसा लगता है कि उनकी सरकार को औद्योगिक घराने के लोग चला रहे हैं।
मनमोहन सिंह ने यहां आयोजित 'इंडिया कॉरपोरेट वीक' के उद्घाटन सत्र में कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाजत और कर चोरी व आर्थिक धांधली रोकने के लिए सरकारी प्राधिकरणों को दिए गए फोन टेपिंग के अधिकार से उद्योग जगत में पैदा हुई घबराहट से मैं वाकिफ हूं।"प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब टाटा समूह के अध्यक्ष, रतन टाटा ने कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ फोन पर हुई अपनी बातचीत को लीक होने को लेकर चिंता व्यक्त की है।
सिंह ने कहा, "जहां एक तरफ इन अधिकारों की आवश्यकता है, वहीं इन अधिकारों को बहुत ही सावधानी के साथ, निर्धारित नियमों, प्रक्रियाओं के तहत उपयोग करने की जरूरत है, ताकि इन अधिकारों का दुरुपयोग न हो।"प्रधानमंत्री ने कहा, "पहले से मौजूद कानूनी तंत्र को, अधिक प्रभावी प्रवर्तन के लिए सख्त होना चाहिए। मैं कैबिनेट सचिव से कह रहा हूं कि वह इन मुद्दों की जांच करें और अगले एक महीने के भीतर कैबिनेट को अपनी रिपोर्ट सौंप दें।"
सर्वोच्च न्यायालय में सरकार की ओर से दायर एक हलफनामे के अनुसार प्रारम्भ में राडिया के फोन इस तरह की शिकायत मिलने के बाद टेप किए गए थे कि वह कथित रूप से एक विदेशी खुफिया एजेंसी की एजेंट हैं और उन्होंने मात्र नौ वर्षो के भीतर 300 करोड़ रुपये बना लिए थे।
हलफनामे में कहा गया है कि बाद में जब कुछ बातचीत को, दूरसंचार कम्पनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन से सम्बंधित मामले में संवेदनशील पाया गया तो फोन टेपिंग का दायरा और अवधि बढ़ा दिया गया।
उधर, आडवाणी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठन (राजग) की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा, "वे कैसी बात करते हैं, बड़े लॉबिस्टों की। बड़े-बड़े व्यापारिक घरानों की।"उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ने इस संप्रग सरकार का गठन नहीं किया है।" आडवाणी ने कहा कि उन्हें लगता था कि संप्रग सरकार के गठन का फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का था।""अब हमें लग रहा है कि इस सरकार का गठन सोनिया गांधी ने भी नहीं किया था। ऐसे लोगों को देखिए जो यह तय कर रहे हैं कि किसे कौन सा विभाग मिलना चाहिए।"
आडवाणी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से साबित हो गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने कैबिनेट की गतिविधियों से ही अनभिज्ञ हैं।आडवाणी ने कहा, "अब हमें पता चला है कि प्रधानमंत्री यहां तक कि अपने कैबिनेट में घट रही कई घटनाओं से ही वाकिफ नहीं हैं।"कर्नाटक में करोड़ों रुपये के भू-आवंटन घोटाले में मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा की संलिप्तता के सवाल पर आडवाणी ने कहा कि इस मामले से प्रभावी तरीके से निपटा जा रहा है।
आडवाणी ने कहा, "पार्टी ने कर्नाटक की घटना को संज्ञान में लिया है और उसके साथ प्रभावी तरीके से निपटा जाएगा।"ज्ञात हो कि येदियुरप्पा ने बेंगलुरू में और उसके आसपास के इलाकों में अपने रिश्तेदारों को प्रमुख भूखंड आवंटित करने में कथित रूप से पक्षपात किया था। इस कारण उन पर इस्तीफे का भारी दबाव बना था। लेकिन पार्टी ने अंतत: उन्हें कुर्सी पर बनाए रखने का निर्णय लिया।आडवाणी ने कहा, "मैं कर्नाटक में अपनी खुद की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित हूं। मामले से निपटा जा रहा है और प्रभावी तरीके से निपटा जाएगा।"
आडवाणी ने मध्यावधि चुनाव के मुद्दे पर कहा कि संसद में गतिरोध पैदा होने के बाद सांसदों में भय पैदा करने के लिए जानबूझ कर मध्यावधि चुनाव की बात फैलाई गई।
आडवाणी ने कहा, "यह केवल भय पैदा करने के लिए है। सांसदों को डराने और विपक्षी एकता को तोड़ने के लिए है।"भाजपा नेता ने कहा, "मध्यावधि चुनाव की बात आधिकारिक तौर पर मंत्रियों की ओर से आई है, जिनके नाम मैं नहीं लेना चाहता। उन्हें पता है कि अभी डेढ़ साल पहले ही चुनाव हुए हैं। पांच साल के लिए निर्वाचित हुआ कोई सांसद भला अपना बाकी कार्यकाल क्यों खलल में डालना चाहेगा।"आडवाणी ने कहा कि राजग ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसलिए नहीं लाया, क्योंकि गैर राजग विपक्षी सदस्यों से समर्थन मिलने की सम्भावना नहीं थी।
ज्ञात हो कि संसद का पूरा शीतकालीन सत्र, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जेपीसी से जांच कराए जाने की विपक्ष की मांग की भेंट चढ़ गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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