वैश्विक मामलों पर अमेरिका के संकटमोचक हॉलब्रुक का निधन
वाशिंगटन। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष दूत और 90 के दशक में बोस्निया में शांति स्थापना के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा चुके रिचर्ड हॉलब्रुक का धमनी की सर्जरी के बाद सोमवार को निधन हो गया। हॉलब्रुक को शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि 69 वर्षीय हॉलब्रुक अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के कार्यालय में गिर पड़े थे जिसके बाद उन्हें जॉर्ज वाशिंगटन विश्ववविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में हॉलब्रुक की धमनी का ऑपरेशन किया गया।
इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि हॉलब्रुक की हालत काफी नाजुक है।हॉलब्रुक का निधन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अफगानिस्तान के संबंध में भविष्य की रणनीति तय करने में जुटे थे।सोमवार को हॉलब्रुक के निधन से कुछ समय पहले ही उनकी पत्नी कैटी और बच्चे ओबामा के साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। ओबामा ने हालांकि अभी हॉलब्रुक के निधन पर किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं दिया है लेकिन कार्यकम के दौरान उन्होंने हॉलब्रुक के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की थी।
ओबामा ने कहा था, "आज अमेरिका और विश्व रिचर्ड हॉलब्रुक के सराहनीय कार्यों की वजह से सुरक्षित है।"हिलेरी क्लिंटन ने एक बयान में कहा, "आज रात अमेरिका ने अपने एक चैम्पियन और समर्पित अधिकारी को खो दिया है।" बयान में हिलेरी ने कहा, "हॉलब्रुक ने लगभग 50 वर्षो तक देश की सेवा की। इस दौरान उन्होंने कई शांति वार्ताओं में हिस्सा लिया।"उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध में हॉलब्रुक के कार्यो की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई थी। हॉलब्रुक जर्मनी में भी अमेरिका के राजदूत रह चुके थे।












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