श्याबाओ को रिहा करे चीन :नोबेल कमिटी

नोबेल शांति पुरस्कार कमिटी के चेयरमैन ने अपील की है कि चीन अपनी जेल में बंद 2010 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता चीन के लू श्याबाओ को तुरंत रिहा करे.
पुरस्कार समारोह में लू श्याबाओ का प्रतिनिधित्व एक खाली चेयर ने किया. चीन इस शांति पुरस्कार से काफ़ी नाराज़ है और पिछले कुछ हफ़्तों में उन्होंने इस पुरस्कार की विश्वसनीयता खत्म करने की कोशिश की है.
चीन ने कहा है कि लू श्याबाओ को ये पुरस्कार देना राजनीतिक नाटक है और ओस्लो नोबेल शांति कमिटी दुनिया के बहुसंख्यक लोगों की मंशा का प्रतिनिधित्व नहीं करती है.
नोबेल पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए पुरस्कार कमिटी के चेयरमैन टूरबिएन यागलैन ने कहा कि चीन ने लाखों लोगों को गरीबी से निकाला है लेकिन एक उभरती विश्व ताकत के रुप में चीन को अपनी आलोचना सकारात्मक रुप से लेना चाहिए.
चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वो किसी भी व्यक्ति या देश का विरोध करते हैं जो नोबेल शांति पुरस्कार के ज़रिए चीन के आंतरिक मामलों या चीन की क़ानूनी संप्रभुता में हस्तक्षेप करना चाहता है. पुरस्कार समारोह के दौरान नार्वे की अभिनेत्री लिव उलमान ने वो बयान पढ़ा जो लू ने दिसंबर 2009 में चीन की एक अदालत में दिया था.
इस बयान में लू ने कहा था, '' मुझे उम्मीद है और मैं देखना चाहता हूं ऐसा भविष्य जिसमें चीन स्वतंत्र हो. दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं जो आज़ादी की मानवीय भूख को ख़त्म कर दे. अंतत: चीन भी एक ऐसा देश बनेगा जहां क़ानून का राज़ होगा और मानवाधिकारों का सम्मान होगा.""
लू चीन की जेल में 11 वर्षों की सज़ा काट रहे हैं. लू के सम्मान में उनका पुरस्कार खाली कुर्सी पर रखा गया. यागलैन ने कहा कि लू ने यह अवार्ड उन लोगों को समर्पित किया है जो 1989 में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के दौरान मारे गए थे. उनका कहना था, '' हम कह सकते हैं कि मिस्टर लू हमें नेल्सन मंडेला की याद दिलाते हैं.""
संयुक्त राष्ट्र का कहना था कि उनके पास इस बात की सूचना है कि चीन ने समारोह से पहले कम से कम 20 कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर रखा है. इसके अलावा चीन में नज़रबंदी, यात्रा पर प्रतिबंध और धमकाने के 120 मामले भी देखे गए हैं.
नोबेल शांति पुरस्कार समारोह के दौरान ची ने बीबीसी की अंग्रेज़ी और चीनी भाषा की वेबसाइट को भी ब्लॉक कर दिया था और बीबीसी टीवी का प्रसारण चीन के भीतर रोक दिया था. कुछ समय पहले से ही लू की पत्नी को बीजिंग के उनके घर में ही नज़रबंद कर के रखा गया है.
नोबेल कमिटी के निदेशक गियर लुंड्सटैड का कहना था कि ओस्लो में हुए समारोह में 48 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. हालांकि इसमें 16 बड़े देशों मसलन रुस, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.












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