भोपाल का नवाबी हमाम हुआ आम
लगभग तीन सौ साल पहले भोपाल के नवाब दौस मुहम्मद खां हुआ करते थे। वह शौकीन मिजाज थे। उन्होंने यूनानी तरीके से कदीमी रॉयल हमाम का 1718 में निर्माण कराया था। उस दौर में नवाब और उनकी बेगम तथा बाद में राजा और रानियां यहां स्नान करने आती थीं।
देश आजाद होने के बाद अन्य इलाकों की तरह भोपाल में भी अब नवाब और उनकी बेगमें तो रहीं नहीं, मगर उनका हमाम है। अब इस हमाम में स्नान का आनंद भोपाल के लोग भी उठाने लगे हैं। हमाम के संचालक मुहम्मद खलील कम बेटे मुहम्मद जीमल बताते है कि खुर्षिया बेगम से हमाम उनकी परिजन गुलशुम जहां मिलने के बाद से उनके परिवार कम लोग इसका संचालन करते आ रहे है।
यह हमाम कुछ इस तरह बना है कि जमीन में तांबे की चादर बिछी हुई है, जिसके नीचे सुरंग बनी है जिसमें आग जलाने से पूरा हमाम ही गरम हो जाता है। मौसम में जैसे जैसे ठंडक बढ़ती है हमाम के अंदर की गर्मी उसी के मुताबिक बढ़ती जाती है। यह हमाम दीपावली से होली तक ही चलता है। हमाम को गर्म रखने में एक दिन में तीन क्विंटल लकड़ी लग जाती है।
इस हमाम को तीन हिस्सों मे बांटा गया है। यहां आने वाले व्यक्ति को सबसे पहले सामान्य तापमान वाले कमरे में ले जाया जाता है, उसके बाद उसे हल्के गर्म पानी से स्नान कराया जाता है। फिर उसे भाप कक्ष (स्टीम रूम) में 15 से 20 मिनट तक बैठाया जाता है और शरीर पर जमे मैल के फूल जाने पर त्वचा पर विशेष तरह की मिट्टी से बनी घिसनी को रगड़ा जाता है।
जमील बताते हैं कि यह घिसनी अजमेर से आई मिट्टी से बनी होती है। इसके बाद पानी से स्नान कराया जाता है फिर विशेष जड़ी-बूटी से बने तेल से मालिश की जाती है। इतना कुछ होने के बाद हमाम में स्नान करने वाले की रंगत ही बदल जाती है। जमील का दावा है कि इस स्नान से रक्त संचार ठीक हो जाता है, सभी रोम छिद्र खुल जाते हैं, दर्द और थकान कम हो जाती है।
भूख बढ़ने के साथ नींद न आने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाती है और त्वचा में निखार आ जाता है। इस हमाम में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। दिन में जहां महिलाओं के लिए यह सुविधा है वहीं शाम छह बजे के बाद पुरुष इस नवाबी स्नान का आनंद ले सकते हैं। यह मजा पाने के लिए पुरुषों को 200 रुपये तो महिलाओं को 250 से 350 रुपये खर्च करना पड़ते हैं।













Click it and Unblock the Notifications