व्यापारिक संबंध मजबूत बनाएंगे भारत-यूरोपीय संघ
ब्रसेल्स। भारत और 27 देशों का संगठन यूरोपीय संघ महत्वपूर्ण व्यापार एवं निवेश समझौते की बाधाएं मिटाकर अपने आर्थिक सम्बंधों में विस्तार करने पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते से यूरोपीय संघ और भारत का आपसी व्यापार बढ़कर करीब 100 अरब यूरो होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बेल्जियम की राजधानी पहुंचने से पहले दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर मतभेदों को दूर करके समझौते का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष अगले साल ईस्टर से पहले इस व्यापक आधार वाले निवेश एवं व्यापार समझौते (बीआईटीए) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस समझौते को मुक्त व्यापार समझौता भी कहा जा रहा है।गुरुवार को यहां पुहंचे मनमोहन सिंह 11वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस दौरान दोनों पक्ष इस समझौते के लिए पिछले तीन साल से चल रही वार्ता की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
यूरोपीय निर्यातक भारत में कार, कीमती उत्पाद और फैशन के क्षेत्र में निर्यात की काफी संभावनाएं देख रहे हैं। भारत यूरोपीय संघ के लिए नौवां सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2009 में आर्थिक मंदी के कारण आई आपसी व्यापार में कमी के बाद वर्ष 2010 में इसमें काफी वृद्धि हुई है। वहीं, भारत के लिए यूरोपीय संघ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस साल यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार 70 अरब डॉलर रहा है।
दोनों पक्षों के बीच यह समझौता इस महीने में पूरा होना था लेकिन कुछ मद्दों पर मतभेद के चलते वार्ता की अवधि बढ़ा दी गई है। यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के प्रदर्शन और बाल श्रम और बाजार तक पहुंच बढ़ाने जैसे मुद्दों को लेकर असहमत नजर आ रहा था।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वाणिज्यिक सम्बंधों के लिए वार्ता के वास्त ये यह मसला अप्रसांगिक है और ऐसा कोई भी समझौता संसद को स्वीकार्य होना चाहिए। शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भारत-बेल्जियम के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए शनिवार सुबह तक ब्रसेल्स में रुकेंगे। यहां वह शुक्रवार शाम को एक आधिकारिक भोज के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री यवेस लेटरमी से मुलाकात करेंगे।












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