'भारत की 'आकस्मिक सैन्य योजना' पर सवाल'

अमरीका ने एक दस्तावेज़ इस बात शक ज़ाहिर किया है कि भारतीय सेना कभी 'कोल्ड स्ट्राट' जैसी सामरिक नीति पर अमल कर सकता है.विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ में कहा गया है,"ये दूतावास की सामूहिक सोच है कि भारत को मिले-जुले परिणाम मिल सकते हैं.भारतीय सेना शुरुआती सफलताओं को बरक़रार रख पाने में दिक्कतों का सामना कर सकती है."अमरीकी आकलन के अनुसार भारतीय नेतृत्व को इस बात का अहसास है कि 'कोल्ड स्ट्राट' का ध्येय बिना परमाणु हथियारों के पाकिस्तान के विरुद्ध सीमित कार्रवाई करना है लेकिन उन्हें ये यक़ीन नहीं है पाकिस्तान इसके जवाब में परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेगा.
विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ में दिल्ली में अमरीका के राजदूत टिमोथी रोमर के अनुसार मुंबई में हुआ चरमपंथी हमला भारत की 'कोल्ड स्ट्राट' नामक सामरिक नीति पर रोशनी डालता है.उनके अनुसार, "पहले तो मुंबई जैसे दुस्साहसी हमले के बावजूद कोल्ड स्ट्राट को लागू नहीं किया गया. इससे 'कोल्ड स्ट्राट' को लागू करने में भारत सरकार की इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है. दूसरे पाकिस्तान को वर्ष 2004 से भारत की 'कोल्ड स्ट्राट' रणनीति के बारे में पता है लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने भारत पर चरमपंथी हमला रोकने के लिए कुछ नहीं किया.ये तथ्य 'कोल्ड स्ट्राट' के असर पर सवाल उठाता है.भले ही भारतीय सेना इस सामरिक नीति के लिए प्रतिबद्ध हो लेकिन कोल्ड स्ट्राट के लिए राजनीतिक सहयोग उतना साफ़ नहीं है."
अमरीकी दस्तावेजों में ये भी कहा गया है कि कई भारतीय उच्चाधिकारी कोल्ड स्ट्राट के पक्षधर नहीं है, इनमें से एक भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन भी हैं.












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