'YSR Congress' करेगी 'जगन' के सपने पूरे!

हैदराबाद। 14 महीने से आंध्रा में राजनैतिक उथुल पुथल का दौर जारी है। वाई एस आर के जाने के बाद उनके बेटे और कडप्पा के सांसद जगन मोहन रेड्डी ने आंध्रा के सीएम पद का सपना देखा लेकिन कांग्रेस ने इसे जल्दबाजी वाला कदम बताते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता के रौशेया को सीएम बना दिया। इन दिनों तेलंगाना समर्थकों की मांग आग पकड़ने लगी और पिछले कई महीनों से आंध्रा इस विरोध का सामना कर रहा है। लेकिन कांग्रेस आलाकमान को भरोसा था कि वहां फैला आक्रोश थम जायेगा। लेकिन अफसोस वहां ऐसा नहीं हुआ।

के रौशेया की बातों को भी दरकिनार रखते हुए जगन मोहन रेड्डी अपनी मनमानी करने लगे और उनके तेवर एक बागी नेता के रूप में उजागर होने लगे। मीडिया और पार्टी में सुगबुगाहट फैल गई कि जगन पर कार्रवाई हो सकती है लेकिन दिल्ली मौन रहा। इसी बीच कांग्रेस आलाकमान और पीएम मनमोहन सिंह के खिलाफ कुछ अप्रत्याशित टिप्पणी जगनमोहन ने साक्षी चैनल के माध्यम से कर दी जिसके बाद ये तय हो गया कि जगन को इस बात की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और इसी घटनाक्रम के बीच में के. रौशेया ने अपनी सेहत का हवाला देते हुए सीएम पद छोड़ दिया जिसके चलते कांग्रेस ने किरण कुमार रेड्डी को आंध्रा का सीएम बना दिया।

राजनीतिक पंडितों का कहना था कि रेड्डी को आंध्रा भेजने के पीछे जगन मोहन रेड्डी को बागी तेवरों को रोकना था। और जैसा कि शनिवार को बताया गया कि सीएम किरणकुमार दिल्ली में हैं और वो वहां के ताजा हालात से सोनिया गांधी को रूबरू कराने वाले है जिसके बाद वो अपना मंत्री मंडल विस्तार करेंगे। लेकिन सोमवार को जगन मोहन रेड्डी ने लोगों को हतप्रभ करते हुए कांग्रेस पार्टी से ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कांग्रेस पर उनके और उनके परिवार पर अपमान करने का आरोप लगाया है। जगन का कहना है कि पार्टी उनके और उनके परिवार में फूट डालना चाहती है।

क्योकि जब से किरण कुमार सीएम बने हैं तब से वो जगन के चाचा वाईएसआर रेड्डी के छोटे भाई विवेकानंद रेड्डी को कैबिनेट में शामिल कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। विवेकानंद पहले कड़प्पा से सांसद थे, लेकिन जगनमोहन के लिए उन्होंने अपना पद छोड़ दिया था। जगन के साथ ही उनकी मां विजयलक्ष्मी ने भी आंध्र के पुलिवेंडुला क्षेत्र से विधायक के रूप में अपना इस्‍तीफा दे दिया है। जगन मोहन रेड्डी ने 'वाईएसआर कांग्रेस' नाम से नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है।

जगन के पैतृक जिले कडप्‍पा में समर्थकों ने जिला कांग्रेस कमेटी दफ्तर का नाम 'इंदिरा भवन" से बदलकर 'वाईएसआर भवन" कर दिया। के. सुरेश बाबू की अगुवाई में कमेटी के सभी सदस्‍यों अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसके अलावा प्रकाशम, कडप्‍पा और अनंतपुर जिले में कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस से नाता तोड़ने का ऐलान किया है।

कांग्रेस के लिए जगन का ये कदम परेशानी का सबब हो सकता है क्योंकि आंध्रा में जगन के समर्थक विधायक भी उनके साथ जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो कांग्रेस के सामने सरकार बचाने का संकट खड़ा हो जाएगा। आंध्र प्रदेश विधानसभा में कुल 294 विधायक हैं और इसमें कांग्रेस के विधायकों की संख्या 156 है। जगनमोहन रेड्डी के पास करीब 20 विधायकों का समर्थन है और यदि ये सभी पार्टी छोड़ते हैं तो सरकार बनाए रखना कांग्रेस के लिए चुनौती होगा। हालांकि कांग्रेस प्रजा राज्यम पार्टी के अध्यक्ष चिरंजीवी से संपर्क में है, जिनके पास 16 विधायक हैं।

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