पाक अधिकृत कश्मीर को मुक्त कराना चाहती थीं इंदिरा गांधी: आडवाणी

आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि इंदिरा गांधी के उद्देश्यों के बारे में उनके मन में विचार न्यूयार्क वित्तीय प्रकाशन के सम्पादक बीजेड खासरू की पुस्तक 'बांग्लादेश लिबरेशन वार : मिथ्स एंड फैक्ट्स' पढ़ने के बाद आया।
आडवाणी ने लिखा, "कुछ सप्ताह से मेरे मस्तिष्क में सवाल चल रहा था कि वर्ष 1971 में जब इंदिरा जी ने बंगालियों के लिए स्वतंत्र बांग्लादेश के निर्माण के लिए शेख मुजीबुर रहमान की मदद करने का निर्णय लिया था, क्या उसी समय वह पश्चिमी पाकिस्तान को तोड़ने और अधिकृत कश्मीर को मुक्त कराने के लिए पश्चिमी पाकिस्तान में कार्रवाई की सोच रही थीं।"
उन्होंने लिखा, "अब तक मैंने इस बारे में किसी से नहीं सुना जो इसे सही ठहराए, लेकिन इस पुस्तक में पर्याप्त आंकड़े दिए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि गांधी अपने इन उद्देश्यों के बारे में सोच रही थीं। वाशिंगटन के तत्कालीन शीर्ष नेता राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंगर दोनों इस बात पर आश्वस्त थे कि गांधी इस दिशा में कार्रवाई करने की सोच रही हैं और इस कार्रवाई में रूस भारत की मदद कर सकता था।"
आडवाणी ने लिखा है कि उस समय भारत के अमेरिका के साथ रिश्ते मधुर नहीं थे और निक्सन गांधी को नापसंद करते थे। जबकि, अमेरिका को पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान और याहया खान काफी पसंद थे। भाजपा नेता के मुताबिक पूर्वी बंगाल के संबंध में भारत और पाकिस्तान संकट के समय अमेरिका ने न केवल अपनी परमाणु क्षमता से युक्त सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में उतार दिया था, बल्कि उसने मास्को को चेताया, "कि वह भारत को पश्चिमी पाकिस्तान में कार्रवाई करने से रोके।"












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