'पाक ने चरमपंथियों का साथ लिया'

उनका कहना है कि पाकिस्तान को लगता था कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान का प्रशासन जिससे उसके संबंध दोस्ताना नहीं थे वह उसकी स्थिति को कम करके न आँक ले. हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि वे इस समय यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि यह स्थिति अब बदल गई है लेकिन वे यह कह सकती हैं कि यह बदल रही है.
उन्होंने साफ़तौर पर यह भी माना है कि अमरीका जिसके ख़िलाफ़ लड़ रहा है उसका एक हिस्सा ख़ुद अमरीका ने ही खड़ा किया है. अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स का कहना है कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए पाकिस्तान ने भारत की सीमा से अपनी सेना का एक बड़ा हिस्सा हटाकर उसे अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर तैनात किया है.
अमरीकी टेलीविज़न एबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीकी अधिकारी पाकिस्तान की सरकार, सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी सबसे चर्चा करता रहा है और बताता रहा है कि उसकी अपेक्षाएँ क्या हैं. उनका कहना था कि अपने राष्ट्रहित में उन्होंने समझौता करना स्वीकार कर लिया है, और अमरीका का साथ देने के लिए वे बड़ी क़ीमत भी चुका रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के बारे में उन्होंने कहा, "प्रगति हो रही है और इसके लिए अधीर नहीं हुआ जा सकता. हम ये नहीं कह सकते कि ख़बरें ठीक नहीं हैं और हम घर जा रहे हैं.हम ऐसा नहीं कर सकते"
अमरीकी विदेश मंत्री ने स्वीकार किया, "हम इस समय जिसके ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं उसका एक हिस्सा अमरीका ने ही तैयार किया है." उन्होंने कहा, "हमने सोवियत संघ के ख़िलाफ़ मुजाहिदीन को तैयार किया. हमने उन्हें प्रशिक्षण दिया, हथियार दिए, धनराशि दी. उसमें वह व्यक्ति भी शामिल है जिसका नाम ओसामा बिन लादेन है."
उन्होंने आगे कहा, "आख़िरकार हमने देखा कि सोवियत सेना अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जा रही है, हमने राहत की साँस ली और कहा, हाँ तो हमने यह हासिल कर ही लिया. लेकिन यह हमारे लिए भी अच्छा नहीं रहा." रॉबर्ट गेट्स का कहना है कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में लोग अमरीका पर कम भरोसा करते हैं. इसी कार्यक्रम में उनके साथ अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स भी मौजूद थे.
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान ने अपने छह डिविज़न के बराबर के अपने सैनिक भारत से लगी सीमा से हटा लिए हैं और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से लगी सीमा पर लगाया है. उन्होंने पाकिस्तान की तारीफ़ करते हुए कहा, "वे तालिबान पर हमले कर रहे हैं, वे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पर हमला कर रहे हैं वे उनके सुरक्षित ठिकानों को नष्ट कर रहे हैं जो हमारी लिए परेशानी का सबब थे."
रॉबर्ट गेस्ट ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों देशों में अमरीका पर लोग कम भरोसा करते हैं. उन्होंने कहा, "दोनों देशों में हम विश्वास की कमी का सामना कर रहे हैं और ऐसा इसलिए है क्योंकि पूर्व में हम ऐसे समय में उनका साथ छोड़ गए थे जो उनके इतिहास के सबसे कठिन क्षण थे."
अमरीकी रक्षा मंत्री ने कहा, "आप क्षण भर में किसी का भरोसा नहीं जीत सकते. वह एक या दो साल में भी नहीं हो सकता. उन दोनों को ही यह भय सताता है कि यदि हमने अफ़ग़ानिस्तान की समस्या हल कर दी, या ऐसा नहीं भी कर पाए तो एक दिन हम उन्हें उनके हाल पर ही छोड़कर चले जाएँगे."
जुलाई, 2011 में अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि तालिबान अपने समर्थकों को ज़रुर यह बता रहे होंगे कि अमरीकी सेना जुलाई, 2011 को अफ़ग़ानिस्तान से चली जाएगी लेकिन उन्हें जल्दी ही पता चल जाएगा कि अगस्त या सितंबर, 2011 में भी हम वहाँ हैं और उन्हें मार रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परिस्थितियों का जायज़ा ले रहे हैं और उसके अनुरुप फ़ैसला लेंगे."
रॉबर्ट गेट्स ने अपनी योजना के बारे में बताया कि वे चाहते हैं कि तालिबान को कमज़ोर करने के साथ ही अफ़ग़ान सेना को मज़बूत किया जाए जिससे कि तालिबान किसी भी इलाक़े पर फिर से कब्ज़ा करने पर विचार न करें. इस सवाल पर कि अमरीकी सेना अल-क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के अलावा यमन और सोमालिया को निशाना क्यों नहीं बना रही है, रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा, "पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा आतंकवाद का केंद्र है. आप चाहे यमन में हों, सोमालिया में या एशिया में या फिर कहीं और उस इलाक़े में लोगों को (चरमपंथियों को) बढ़ावा मिल रहा है, वहाँ लोगों को प्ररित किया जा रहा है."
उन्होंने कहा, "उन्हें अक्सर ओसामा बिन लादेन और जवाहिरी और उनके साथियों से मार्गदर्शन मिल रहा है कि किस तरह की योजना बनानी है और किस तरह उन्हें अपना ध्यान अमरीका पर केंद्रित रखना है."
उनका कहना था कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर सिंडिकेट या संघ बना रखा है. उन्होंने इसका विवरण देते हुए कहा कि वहाँ सिर्फ़ अलक़ायदा नहीं है वहाँ पाकिस्तान के तालिबान हैं, अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान हैं और हक़्क़ानी का पूरा ढाँचा मौजूद है. उनका कहना है कि वहाँ बहुत से संगठन एक साथ हैं और उनमें से किसी एक को मिली सफलता सबको मिली सफलता होती है.












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