बिहार में 10 फ़ीसदी मतदान

बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार में विधानसभा चुनाव के पाँचवे दौर का मतदान ज़ोर पकड़ रहा है और अच्छी संख्या में लोग मतदान के लिए निकल रहे हैं. सुबह नौ बजे तक अरवल विधानसभा क्षेत्र में 10 फ़ीसदी और नालंदा में 12 फ़ीसदी मतदान हो गया था. पटना के पास फुलवारी शरीफ़ मुस्लिम बहुल इलाक़े में लोगों की भीड़ लगी थी और ग्रामीण और शहरी इलाक़ों में लोगों की गहमागहमी थी.
ऐसा अनुमान है कि इस दौर में सबसे अधिक मतदान हो सकता है. लेकिन मसौला और हुलासचक के लोगों का कहना है कि मतदाता पत्र होने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची में नहीं थे. उनका कहना था कि लगभग 350 लोगों को मतदान में हिस्सा नहीं लेने दिया गया. उनका आरोप था कि राजनीतिक कारणों से ऐसा किया गया है.
उल्लेखनीय है कि पाँचवें दौर में राज्य के आठ ज़िलों की 35 विधानसभा सीटों के लिए मतदान चल रहा है. उल्लेखनीय है कि इन 35 सीटों में से अधिकांश यानि 22 सीटों पर वर्ष 2005 के चुनाव में जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी (जदयू-भाजपा) गठबंधन की जीत हुई थी.
अहम दौर
इस दौर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रभाव वाले गृहक्षेत्र नालंदा ज़िले की वो सात सीटें भी शामिल हैं, जिनमें से एक पर भाजपा और बाक़ी सभी छह सीटों पर जदयू को पिछले चुनाव में सफलता मिली थी. पांचवे दौर की 35 सीटों में से छह पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और एक पर अभी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) का कब्ज़ा है.
ऐसा अनुमान है कि इस दौर में सबसे अधिक मतदान हो सकता है. बाक़ी दो भाकपा- माले और दो कांग्रेस के हिस्से में है जबकि नवादा ज़िले में तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मेदवार जीते थे. इस बार के चुनाव में लालू प्रसाद यादव की पूरी कोशिश ये है कि मध्य बिहार में राजद गठबंधन की सीटें बढाकर नीतीश कुमार के सबसे पुख़्ता राजनीतिक आधार को तोड़ा जाए.
मंगलवार का मतदान जिन क्षेत्रों में हो रहा है, उनमे पटना ज़िले के चार, नालंदा के सात, शेखपुरा के दो, जहानाबाद के तीन, अरवल के दो, गया के पांच और नवादा ज़िले के भी पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. इन इलाक़ों में नक्सली गतिविधियाँ काफ़ी लम्बे अर्से से रही हैं. ख़ासकर गया ज़िले में मतदान के दौरान नक्सली हिंसा की आशंका ज़्यादा है. यही कारण है कि तमाम संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों की तैनाती की गई है.












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