'..फिर वही करुंगा': परवेज़ मुशर्रफ़

पाकिस्तानियों से अपने एक संबोधन के दौरान मुशर्रफ़ ने कहा कि 'जो भी देश की अखण्डता के ख़िलाफ़ खड़ा होगा उसे कुचल कर रख दिया जाएगा'. जनरल मुशर्रफ़ न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी नागरिकों के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जिसके दौरान उनके ख़िलाफ़ ज़बर्दस्त प्रदर्शन हुआ और जम कर नारेबाज़ी हुई.
शनिवार की शाम न्यूयॉर्क में एक स्थानीय टेलीविज़न साउंड व्यू स्टूडियो की इमारत के बाहर जहां जनरल मुशर्रफ़ पाकिस्तानियों को संबोधित करने वाले थे वहां पाकिस्तानी राजनीतिक गुट समेत अन्य ग्रुपों के कार्यकर्ता पहुंच गए. वे अपने साथ बैनर लिए हुए थे और उनके पास लाउडस्पीकर भी थे. इनमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़ शरीफ़), ख़ैबर सोसाइटी, पाकिस्तान यूएस फ़्रीडम फ़ोरम, पाकिस्तानी ऐडवोकेट्स ऑन ह्यूमन राइट्स और तहरीके मुहासबा पाकिस्तान के कार्यकर्ता शामिल थे.
वे इस प्रकार के नारे लगा रहे थे-- 'आईन (संविधान) का क़ातिल परवेज़ मुशर्रफ़', 'बुगटी और लाल मस्जिद का क़ातिल परवेज़ मुशर्रफ़', 'सिंध का क़ातिल', 'पंजाब का क़ातिल', 'बलूचों का क़ातिल' और 'पख़तूनों का क़ातिल परवेज़ मुशर्रफ़'.
उनके बैनर पर लिखा हुआ था-- 'डाक्टर आफ़िया सिद्दीक़ी को गिरफ़तार करवा कर अमरीका के हवाले करने का ज़िम्मेदार मुशर्रफ़'. उन्होंने अपने बैनर पर ये भी लिख रखा था कि 'अमरीकी विदेश मंत्रालय परवेज़ मुशर्रफ़ का अमरीकी वीज़ा रद् करे'. सुरक्षा के सख़्त इंतिज़ाम में पाकिस्तानियों से अपने संबोधन में परवेज़ मुशर्फ़ ने दावा किया कि उनकी पार्टी देश के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की पार्टी है और वह पाकिस्तान का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, 'उनके पुनर्निर्मित पाकिस्तान में हर नागरिक और ख़ास तौर से महिलाओं और अल्पसंख्यकों को अधिकार प्राप्त होंगे'. मुशर्रफ़ ने कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान की जनता ने आन वाले चुनाव में चुन लिया तो पुनर्निर्मित पाकिस्तान में किसी को मुसलमान, हिंदू या ईसाई समझ कर नहीं बरता जाएगा बल्कि ऐसे सारे लोग सबसे पहले पाकिस्तानी होंगे और पाकिस्तान में बराबर के नागरिक होंगे.
उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि एनआरओ पर हस्ताक्षर करना उनकी ग़लती थी और वह इस पर माफ़ी मांग चुके हैं. जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने हाल ही में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई है. लेकिन इसके साथ उन्होंने ये भी कहा कि वह लाल मस्जिद और अकबर बुगटी के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों पर कोई माफ़ी नहीं मांगेंगे क्योंकि उन्होंने राष्ट्रहित और आतंकवाद के ख़िलाफ़ ये कार्रवाइयाँ की थीं.
उन्होंने कहा कि अगर वह निर्वाचित होकर सत्ता में आए और फिर अगर लाल मस्जिद और अकबर बुगटी जैसे हालात पैदा हुए तो वह फिर से वही कार्रवाईयां करने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने दावा किया कि वह वर्दी पहनने के बावजूद डिक्टेटर नहीं थे चाहे उन्हें पाकिस्तान के अंदर और बाहर तानाशाह समझा गया. पाकिस्तान के पूर्व फ़ौजी शासक ने जहां नवाज़ शरीफ़ की कड़ी आलोचना की वहीं उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा पीपीपी सरकार और राष्ट्रपति ज़रदारी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पहले से ही अस्थिरता का सामना है और पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के बारे में लोगों को सब कुछ मालूम है इसलिए वह उस पर टिप्पणी कर के देश की अस्थिरता को बढ़ाना नहीं चाहते.












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