मुंबई में ओबामा का संदेश...

मुंबई में ओबामा का संदेश...

अपनी भारत यात्रा के पहले दिन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुंबई के ताज होटल पहुँचकर 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों के प्रभावितों से मुलाकात की है. उन्होंने इस मौक़े पर एक संदेश भी दिया जिसके मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

"मैं यहाँ स्पष्ट संदेश देने के लिए आया हूँ - आतंकवाद के ख़िलाफ़ अमरीका और भारत एक जुट हैं. हम 26 नवंबर 2008 के स्मारकों पर जाएँगे और कुछ पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात भी करेंगें.

ताज भारतीयों के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है. यहां खड़े होकर हम ये संदेश देना चाहते हैं कि हम अपने लोगों को सुरक्षित देखना चाहते हैं.

हम कभी भी 26/11 के हमलों की तस्वीरें नहीं भूल सकते. नवंबर 2008 में ताज से निकलते हुए शोले आसमान को चार दिनों तक रौशन करते रहे.

जिन्होंने मुंबई पर हमला किया वो इस शहर और भारत का मनोबल तोड़ना चाहते थे, लेकिन वे विफल रहे क्योंकि दूसरे ही दिन मुंबई के लोग अपने अपने काम पर वापस आए.

हम आतंकवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए भारत के साथ हैं. हम लोगों ने और सारी दुनिया ने इन हमलों को देखा और सभी को इस पर दुख हुआ.

हत्यारे बेगुनाह लोगों को मारने आए थे लेकिन वे अपने मक़सद में विफल रहे. होटल के स्टाफ़ और मैनेजर ने अपने परिवार के मारे जाने के बावजूद लोगों को बचाने का काम किया.

हमलावर विभिन्न धर्मों के लोगों को निशाना बनाना चाहते थे लेकिन विफल रहे. लेकिन हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और मुसलमानों ने मिलकर उसका सामना किया.

26/11 के हमलावर हमारे बीच दरार पैदा करना चाहते थे......26/11 के हमलावरों को सज़ा मिलनी ही चाहिए.

जैसा 26/11 को भारत में हुआ वैसा ही 9/11 को अमरीका में हुआ था.

अमरीका और भारत एक दूसरे से और अधिक सहयोग करेंगे और मैं भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के दौरान इस दिशा में बढ़ने का प्रयास करुँगा.

इतिहास हमारे साथ है और हमने ऐसी घटनाएं देखी हैं. बेगुनाहों को निशाना बनाने वाले हत्यारे और बर्बादी के लिए ज़िम्मेदार लोगों को बख़्शा नहीं जाएगा.

मुंबई उम्मीद और ख़्वाबों को साकार करने का प्रतीक है यहां लोग दूसरे शहरों और गांव से अपने ख़्वाब की ताबीर के लिए आते हैं.

हमलों के दूसरे दिन मुंबई के लोग काम पर आए. होटल के स्टाफ़ अपनी ड्यूटी पर आए और कुछ ही हफ़्तों में जिस होटल पर हमला हुआ था उसने फिर से मेहमानों का स्वागत करना शुरू कर दिया.

इस देश के राष्ट्रपिता की हत्या के मौक़े पर नेहरू ने कहा था - चाहे हवाएं कितनी ही तेज़ क्यों न हों आंधियां ही क्यों न चल रही हों हम कभी भी आज़ादी की मशाल को बुझने नहीं देंगे.

आप भारत में इस पर विश्वास करते हैं और हम अमरीका में इस पर विश्वास करते हैं.

आतंकवाद के ख़िलाफ़ हम भारत के साथ अपने सहयोग को और आगे ले जाना चाहते हैं."

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