ममता बोलीं, राहुल को राजनीति सीखने दें (लीड-1)
ममता ने बुधवार को एक बंगाली समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "मैं राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल दौर के बारे में कुछ नहीं कहना चाहती। मुझसे उनके बारे में कुछ न पूछें। आप मुझसे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी या सोनिया गांधी के बारे में पूछिए जिनके साथ मैंने काम किया है।"
उन्होंने कहा, "मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगी। यह अच्छी बात है कि वह (राहुल) राजनीति में हैं। उनके साथ मेरा आशीर्वाद है लेकिन पहले उन्हें राजनीति को समझने दीजिए।"
राहुल ने 14 से 16 सितम्बर तक पश्चिम बंगाल का दौरा किया था। उनकी इस यात्रा का मकसद युवा कांग्रेस की सदस्यता को बढ़ाना था। जब ममता से यह पूछा गया कि क्या वह राहुल को राजनीति में बच्चा करार देना चाहती हैं तो उन्होंने कहा, "मैं ऐसा कुछ नहीं कर रही। यह आप कह रहे हैं।"
इसके साथ ही रेल मंत्री ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन की सरकार में आने पर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी मुख्यमंत्री बनें तो उन्हें कोई ऐतराज नहीं है।
राज्य में अगले साल विधानसभा का चुनाव होना है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा बीते 33 वर्षो से राज्य की सत्ता में निरतंर बना हुआ है। अब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनाव है। राज्य में ममता की पार्टी और कांग्रेस ने पिछला लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था।
ममता ने कहा, "अगर 2011 के चुनाव के बाद प्रणब दा मुख्यमंत्री पद स्वीकार करते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मुझे सत्ता या मुख्यमंत्री पद का कोई लालच नहीं है। मैं आम लोगों के लिए यह लड़ाई लड़ रही हूं जो माकपा के अत्याचार से त्रस्त हो चुके हैं।"
उन्होंने कहा, "मैंने प्रणब दा से कहा था कि सत्ता में आने पर आप राज्य की जिम्मेदारी संभालें। मैंने उनसे यह भी कहा कि उन्हें मैं पूरा समर्थन दूंगी। इस पर वह हंसने लगे और कहा कि 'क्या आप पागल हो गई हैं?' यह फैसला जनता को करना है।"
इसके साथ ही ममता ने आरोप लगाया कि दो साल पहले सिंगूर में चलाए गए भूमि अधिग्रहण विरोधी अभियान के दौरान राज्य के आवासीय मामलों के मंत्री गौतम देब ने उन्हें फोन कर धमकी दी थी। उन्होंने कहा, "सिंगूर मामले के दौरान पश्चिम बंगाल के आवासीय मामलों के मंत्री गौतम देब ने मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की तरफ से भूमि अधिग्रहण मामले में हमारी मांगों को लेकर फोन पर बात की थी।"
रेल मंत्री ने बताया, "एक दिन गौतम ने मुझे फोन कर सिंगूर में बैठक आयोजित नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मुझे सिंगूर में बैठक करने की अनुमति नहीं देगी लेकिन हमने उनकी इस धमकी को अनसुना कर दिया था।"
उल्लेखनीय है कि बनर्जी और उनकी पार्टी ने हुगली जिले के सिंगूर में टाटा के नैनो परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले का विरोध किया था। बनर्जी ने इस दौरान 26 दिनों की भूख हड़ताल भी की थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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