सुप्रीम कोर्ट का सवाल 'संयुक्त प्रवेश परीक्षा का विरोध क्यों'?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश में इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने सम्बंधी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जवाब मांगा। अदालत ने कहा 'मंत्रालय लिखित बताए कि उसे संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने से क्यों आपत्ति है'?

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और न्यायमूर्ति एके पाठक की बेंच ने 2011-12 से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) आयोजित करने के लिए अदालत की अनुमति के लिए दायर याचिका पर स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी किया। सीबीएसई की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अल्ताफ अहमद ने कहा कि एक परीक्षा होने से सीईटी विद्यार्थियों को मदद पहुंचाएगा। इस पर अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता से उस प्रक्रिया के बारे में पूछा जो सीबीएसई, सीईटी में सफल होने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश देने में अपनाएगा।

अल्ताफ अहमद ने अदालत को बताया कि मेडिकल और इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग मेरिट सूची होगी। सफल विद्यार्थियों की काउंसलिंग के बाद उन्हें पाठ्यक्रम और कॉलेज आवंटित कर दिए जाएंगे। जब स्वास्थ्य मंत्रालय के वकील ने प्रस्ताव का विरोध किया, तब न्यायमूर्ति रवींद्रन ने पूछा, "यदि यह वकाई में विद्यार्थियों के हित में है, फिर आप इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?"

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए जब कहा कि इस तरह की परीक्षा आयोजित करने में खास कठिनाइयां हैं, तो अदालत ने पूछा, "क्या यह उचित कठिनाई है या दो मंत्रालयों के बीच की विभागीय लड़ाई?" अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय से अपनी आपत्तियों को लिखित में देने के लिए कहा।

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