लालू बहुत गुस्से में हैं

लालू बहुत गुस्से में हैं

मणिकांत ठाकुर

बीबीसी संवाददाता, पटना

लालू प्रसाद यादव कहते हैं, 'ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नीतीश ने ठगा नहीं.'

बिहार में चुनावी राजनीति का तापमान चढ़ा हुआ है और लालू प्रसाद यादव वहाँ नीतीश कुमार से सत्ता छीनने की कोशिश में जी-जान से जुटे हैं.ऐसे में कुछ अख़बारों और टेलीविज़न चैनलों के चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में उनकी सत्ता-संभावना पर संदेह व्यक्त हो जाए,तो उनका भड़कना स्वाभाविक है. मैं जब उनसे बात-चीत करने पहुंचा तो उस समय वो मीडिया को ख़बर देने के बजाय मीडिया की ख़बर लेने पर तुले हुए थे.

कहने लगे, "तथाकथित बुद्धिजीवी जो दिल्ली में बैठकर, चुनाव से पहले ही जीत-हार के बारे में 'पेड न्यूज़' वाला मेनुपुलेशन करते हैं, सर्वेक्षण के नाम पर किसी के पक्ष में मनोवैज्ञानिक मुहिम चलाते हैं, रिजल्ट के बाद ऐसे मीडिया वालों के मुंह पर जब कालिख पुतेगी, तब मैं उन से मिलूंगा.'' लालू प्रसाद ख़ासे गुस्से में थे, सो उन्होंने कहा, ''राज्य की मौजूदा सरकार जनता के अरबों रूपए मुख्यमंत्री के प्रचार के लिए मीडिया पर ख़र्च करके उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और चीन से भी बड़ा चमत्कारी विकास वाला घोषित करवा रही है.''

मैंने पूछा कि इस चुनाव में आप के ख़िलाफ़ जिस बात का सब से ज़्यादा प्रचार हो रहा है,वो है पंद्रह वर्षों के लालू-राबड़ी राज में बिहार का कथित विनाश. इस सवाल पर उन्होंने कहा, ''आज एक राज़ की बात मैं खोल ही देता हूँ. आप मीडिया वाले जिस आदमी (नीतीश कुमार )की बात को हवा दे रहे हैं, वो उसी पद्रह साल वाले राज में छह साल तक हमारे साथ थे.और हमसे क्यों अलग हुए इसकी असलियत बताता हूँ.मेरी भूल थी कि एक दिन दिल्ली के बिहार भवन में मैंने उन्हें सूचना दी कि चारा घोटाले के अभियुक्त में आप का भी नाम है.'' लालू प्रसाद ने आगे कहा,''बस इतना सुनना था कि वो उसी दिन से इस जुगाड़ में लग गये कि कैसे सीबीआई पर दबाव डाल कर अपना नाम कटवा लिया जाए. और इसी क्रम में वो मुझे छोड़ के एनडीए की गोद में जा बैठे और उनका काम हो भी गया. अब तो ये बात रांची की एक अदालत में दर्ज भी हो चुकी है कि नीतीश कुमार को घोटालेबाज़ ने रक़म दी थी.'' लेकिन मैंने पूछा कि नीतीश जी ने आप से अलग होने का कारण तो उस मतभेद को बताया है, जो अति पिछड़ी जातियों को वाजिब हक़ देने के मामले में आप के और उन के बीच दूरी के बढ़ने को लेकर है. आप एक ख़ास तरह का सामाजिक न्याय चाहते थे, जो उन्हें क़बूल नहीं था. इस बात पर लालू प्रसाद ने कर्पूरी ठाकुर के समय उठे विवाद का ज़िक्र करते हुए लम्बा भाषण दिया और अंत में निष्कर्ष दिया कि दरअसल सीबीआई से बचने के लिए और भाजपा के साथ सत्ता के लालच में ये हमसे अलग हुए.

लालू प्रसाद यादव ने कहा,''सच मानिये, नीतीश कुमार 'एंटी बैकवर्ड 'और 'एंटी फॉरवर्ड 'दोनों हैं. कोई ऐसा सगा नहीं,जिसे नीतीश ने ठगा नहीं. ''

कांग्रेस से अपने संबंधों को इस चुनाव में और बिगाड़ लेने की बात पर लालू बोले कि वो मूलतः कांग्रेस विरोधी विचारधारा के रहे हैं लेकिन सांप्रदायिक ताक़तों को दिल्ली की गद्दी से दूर रखने के लिए वो कांग्रेस के साथ सत्ता में गये. इस पर मैंने पूछा कि आपके दल के सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह ने तो बयान दिया है कि कांग्रेस से राष्ट्रीय जनता दल का रिश्ता नहीं तोडा जाना चाहिए. ये सुन कर लालू प्रसाद कुछ खिन्न हुए और कहा, ''वो उनका पुराना बयान है और अभी रिश्ता जोड़ने जैसी कोई बात नहीं है."

मैंने टोका कि फिर जब अगली बार केंद्र में सांप्रदायिक शक्ति को रोकने की नौबत आयेगी तो आप कांग्रेस के साथ हो लेंगे.

इस पर लालू बोल उठे, '' बिलकुल नहीं, कांग्रेस और भाजपा दोनों मिले हुए हैं, इनको चांस नहीं देंगे हमलोग. दूसरा तलाश कर लेंगे. और बिहार में तो कांग्रेस की हवा निकली हुई है, कोई वजूद नहीं है. सारी बीमारी की जड़ में तो ये कांग्रेस ही है.''

बातचीत में उस समय लालू प्रसाद फिर भड़क उठे, जब मैंने कहा कि एक तरफ तो आप राज्य की राजनीतिक परिस्थिति में अब किसी सवर्ण का यहाँ मुख्यमंत्री बन पाना असंभव-सा मानते हैं और दूसरी तरफ सवर्णों के लिए भी सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण की वक़ालत करते हैं.क्या ऐसा आरक्षण संभव है? थोड़े तल्ख़ होकर लालू प्रसाद ने कहा, '' किसने कहा कि यहाँ सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं बन सकता ? ये सब ग़लत प्रचार है और मैंने तो घोषणापत्र में लिखा है कि सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देंगे और जो दल इसे मानते हैं, वो ऐसा प्रस्ताव सदन में लाकर पारित करवाने में मदद करें !'' 'महादलित' का नीतीश सरकार की तरफ रुझान बढ़ने जैसी बात को भी उन्होंने काटा और कहा कि सबसे ज़्यादा तो नीतीश राज में कथित महादलित को ही ठगा जा रहा है. वादा किया था कि तीन डिसमिल ज़मीन देंगे लेकिन ठग लिया ! फिर बातचीत जल्दी समेटने का आग्रह करके उन्होंने,'थेंक -यू ' कहा और मेरी तरफ़ ऐसे देखा जैसे कह रहे हों कि आप सब मीडिया वाले लगभग एक जैसे ही हैं.

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