बिहार चुनाव: अजब विरोध और गजब प्रदर्शन

Protest
पटना। यूं तो बिहार में विधानसभा चुनाव के पूर्व टिकट बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के विरोध का इतिहास पुराना है। इस बार भी चुनावों से पहले टिकटों के बंटवारे के लेकर सभी राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

कार्यकर्ताओं ने इस बार विरोध का अजब-गजब तरीका अपनाया हुआ है। अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए कार्यकर्ता अर्धनग्न प्रदर्शन और अर्थी जुलूस निकालने से लेकर बाल मुंडवाने और श्राद्ध कर्म तक के तौर तरीके विरोध स्वरूप अपना रहे हैं।

राज्य के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को टिकट वितरण से नाखुश कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। दो दशकों के बाद राज्य में अकेले चुनाव लड़ रही कांग्रेस को इस मामले में कुछ ज्यादा फजीहत उठानी पड़ रही है।

टिकट बंटवारे से असंतुष्ट राज्य के महुआ विधानसभा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को प्रदेश कार्यालय के समक्ष विधायक दल के नेता अशोक राम का बजाप्ता का हिंदू रीति-रिवाज से 'श्राद्ध कर्म' तक कर डाला।

श्राद्ध कर्म करने वाले कांग्रेस नेता प्रेमनाथ सिंह उर्फ राजा भैया ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेतृत्व ने टिकट बंटवारे में कर्मठ लोगों को नजरअंदाज किया है। इससे पहले मंगलवार को नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक अर्थी जुलूस निकालकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं का अंतिम संस्कार किया था और अपने बाल भी मुंडवा लिए थे।

समस्तीपुर के विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 से 800 की संख्या में नाराज कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय के सामने लगातार धरना दे रहे हैं। कांग्रेस के कुछ क्षुब्ध कार्यकर्ताओं ने दो अक्टूबर को पटना हवाई अड्डे पर प्रदेश अध्यक्ष महबूब अली कैसर तथा कांग्रेस

विधायक दल के नेता अशोक राम के साथ धक्का-मुक्की की थी। जनता दल (युनाइटेड) के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय के समक्ष टिकट बंटवारे से नाराज कार्यकर्ताओं ने सोमवार को खुले

बदन प्रदर्शन किया था। एक प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता ने कहा, "शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने राजद से आए विनोद यादव को प्रत्याशी बनाया है, जिसका हम विरोध कर रहे हैं।" राष्ट्रीय जनता दल के नाराज कार्यकर्ता भी प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ कर चुके हैं।

सत्ता के लिए ये मारामारी

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट की खातिर यह मारा-मारी केवल सत्ता और पैसे के लिए है। राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद का कहना है, "पहले भी विरोध होता था मगर अब तरीका काफी बदल गया है।"

उन्होंने कहा कि खादी धारण करने वाले अब खुले बदन प्रदर्शन कर रहे हैं जो राजनीति के गिरते स्तर का प्रतीक है। उन्होंने इसके लिए दलों के नेतृत्व को भी जिम्मेवार बताया। उल्लेखनीय है कि राज्य में 243 सीटों के लिए छह चरणों में 21 अक्टूबर से 20 नवंबर तक चुनाव होने हैं। मतगणना 24 नवंबर को होगी।

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