कर्नाटक संकट सुलझाने में भाजपा के साथ संघ भी हुआ सक्रिय (राउंडअप)
भाजपा ने इस संकट को सुलझाने के लिए अपने वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू को बेंगलुरू भेजा है। वहां पहुंचते ही उन्होंने दावा किया कि 11 अक्टूबर को विश्वास प्रस्ताव में येदियुरप्पा सरकार की नैयां अवश्य पार होगी। उन्होंने कहा, "हमें बहुमत साबित करने का विश्वास है। संकट समाप्त हो जाएगा और असंतुष्ट विधायक पार्टी में लौट आएंगे।"
नायडू के अलावा पार्टी महासचिव अनंत कुमार और पिछले साल येदियुरप्पा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले जनार्दन रेड्डी ने भी संकट टालने के लिए मोर्चा संभाल रखा है। सूत्रों का कहना है कि बागी विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के फार्मूले के तहत संकट समाधान में पार्टी के दिग्गज जुटे हुए हैं।
इस बीच, सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि संघ भी सरकार बचाने की कोशिशों में जुट गया है। सूत्रों का कहना है कि संघ के एक शीर्ष पदाधिकारी ने इस सिलसिले में कनार्टक के वरिष्ठ संघ पदाधिकारियों से बातचीत कर संकट टालने में सक्रिय भूमिका निभाने की हिदायत दी है।
ज्ञात हो कि दक्षिण भारत में भाजपा की पहली सरकार कर्नाटक में ही बनी है और संघ नहीं चाहता कि किसी भी सूरत में यह राज्य भाजपा के हाथ से निकले।
येदियुरप्पा ने भी कन्नूर में कहा कि यह राजनीतिक संकट जल्द खत्म हो जाएगा और वह विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे।
इस बीच, येदियुरप्पा ने सरकार से समर्थन वापस लेने वाले मंत्रिमंडल के दो कैबिनेट मंत्रियों को उनके पद से बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से मत्स्य पालन मंत्री आनंद अस्नोतिकर और नगर निगम एवं स्थानीय निकाय मंत्री बालचंद्र जोरखिहोली को उनके पद से हटाने की सिफारिश की है।"
बुधवार को दो बागी भाजपा विधायक बी. पी. हरीश और डी. जी. पाटील येदियुरप्पा के खेमे में वापस लौट आए थे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपना समर्थन जताया है।
पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष ईश्वरप्पा ने कहा, "हमें विश्वास है कि बागी विधायक जल्द ही वापस आ जाएंगे और यह संकट खत्म हो जाएगा। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि चार-पांच असंतुष्ठ विधायक वापस आने के लिए तैयार हैं।"
इधर, नई दिल्ली में भाजपा ने जनता दल (सेक्युलर) और कांग्रेस पर राज्य के कुछ विधायकों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "समस्या का समाधान जल्द हो जाएगा। राज्यपाल को सरकार से समर्थन वापस लेने सम्बंधी पत्र देने वाले विधायकों को याद रखना चाहिए कि दल बदलने पर उनकी सदस्यता खत्म हो सकती है।"
उन्होंने कहा कि जद (एस) नेता एच.डी. कुमारस्वामी और कांग्रेस राज्य में सत्ता से बाहर हो चुकी है, इसलिए वे हताशा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे कुछ विधायकों को गुमराह कर रहे हैं..उन्हें इस नाटक में शामिल नहीं होना चाहिए।"
भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी कर्नाटक में अपनी सरकार को कायम रखने के लिए सभी उपाय करेगी।
इस बीच, पांच बागी विधायक गुरुवार को दाबोलिम हवाईअड्डे पर उतरे, उन्हें तत्काल गोवा के एक रिसोर्ट में पहुंचाया गया।
इन भाजपा विधायकों के नामों का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन यह दल 12 बजकर 35 मिनट पर मुम्बई से गोवा पहुंचे विमान से उतरा। सूत्रों के मुताबिक भाजपा विधायकों के लिए दक्षिण गोवा के एक रिसोर्ट में तीन दिन के लिए कमरे बुक कराए गए हैं।
कर्नाटक में 29 महीने पुरानी भाजपा सरकार 19 विधायकों और मंत्रियों के समर्थन वापस लेने के कारण अल्पमत में आ गई है। इनमें से 14 विधायक भाजपा के हैं। इन विधायकों ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को समर्थन वापसी का पत्र सौंपा है।
कर्नाटक की 225 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की 29 महीने पुरानी सरकार अल्पमत में आ गई है। समर्थन वापस लेने वालों में 14 विधायक भाजपा के और पांच विधायक निर्दलीय हैं। येदियुरप्पा सरकार को समर्थन दे रहे विधायकों की संख्या अब घटकर 98 रह गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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