पाकिस्तानी राजनीति में मजबूती से आगे बढ़ रही हैं महिलाएं
इस्लामाबाद, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पुरुष प्रधान राजनीतिक परिदृश्य में महिलाएं भी अब मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। पाकिस्तान में नेशनल असेम्बली और प्रांतीय असेम्बली में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) की सदस्य कश्माला तारिक और मारवी मेनन, जमायते इस्लामी की समीया काजी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की फोजिया वहाब और शेरी रहमान कुछ ऐसी चर्चित महिलाएं हैं जो आरक्षित सीटों से चुनाव जीती हैं।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए कश्माला ने कहा, "राजनीति में हो रहे बदलाव काफी उत्साहजनक हैं, पुरुष राजनेता भी महिलाओं से जुड़े मद्दों की अहमियत समझ रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "मैं इस तर्क से सहमत नहीं हूं कि आरक्षित सीटों पर चुने जाने के कारण महिला जनप्रतिनिधि अपने आप को कमजोर महसूस करती हैं।" उन्होंने कहा कि हमारी क्षमताओं का आंकलन हमारे प्रदर्शन के आधार पर किया जाना चाहिए।
राजनीतिक परिदृश्य में सबसे बड़ा बदलाव चुनावों में केवल स्नातक डिग्रीधारी लोगों को हिस्सा लेने की अनुमति दिए जाने के कारण आया है।
इसके कारण कई पुराने राजनेता राजनीति से बाहर हो गए हैं और उन्होंने अपनी पत्नी, बेटी या बहन को राजनीति में उतारा है। ये महिलाएं अब कानून निर्माण और चुनाव के दौरान बड़े जनसमुदाय को संबोधित करने जैसे सभी काम कर रही हैं।
हिना रब्बानी खैर देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। हिना दक्षिण पंजाब के प्रमुख राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता नूर रब्बानी खैर स्नातक नहीं होने के कारण इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल चुनाव में हिस्सा लेने के लिए स्नातक होने की शर्त हटा दी थी। इससे पहले 2008 के चुनाव इसी शर्त के आधार पर हुए थे।
राजनीतिक विशेषज्ञ हसन सईद ने आईएएनएस से कहा, "स्नातक होने की शर्त के कारण राजनीति से बाहर हुए कई लोग अब दोबारा वापस आएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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