जरूरत पड़ी तो कड़े फैसले लूंगा : गिलानी

सोमवार को यहां संवाददाताओं के एक समूह के साथ बैठक में गिलानी ने कहा, "मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए कि न्यायपालिका देश में लोकतंत्र चाहती है और उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता उसे सशक्त बनाना है। हम सभी संस्थाओं को सशक्त बनाएंगे और मेलमिलाप की राजनीति जारी रखेंगे।"

समाचार पत्र डॉन में गिलानी के हवाले से कहा कि राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ)के लाभार्थियों की विश्वसनीय एवं पुष्ट सूची मिलने के बाद वह कानून के अनुसार फैसला लेंगे।

गिलानी ने कहा कि विधि मंत्रालय, एनएबी और प्रतिष्ठान एनआरओ से लाभान्वित होने वालों की सूची की पुष्टि कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फैसला कानून के अनुरूप लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "राष्ट्र के व्यापक हित में हुआ तो मैं कड़े फैसले लूंगा।"

एनआरओ अध्यादेश पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 2007 में जारी किया था। इसके तहत अन्य बातों के अलावा भ्रष्टाचार, गबन और गैर कानूनी धन को वैध बनाने के आरोपी राजनीतिज्ञों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नौकरशाहों को माफी दे दी गई थी।

एक सवाल के जवाब में गिलानी ने कहा कि कुछ तत्व सेना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी सेना लोकतंत्र समर्थक और बेहद पेशेवर है। राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के साथ मेरी गत 27 सितम्बर की बैठक को विवादित बनाने की कोशिश की गई। बैठक का कार्यक्रम पहले से था और यह सर्वोच्च न्यायालय में एनआरओ मामले की सुनवाई के बाद बुलाई गई।"

उन्होंने कहा कि नाटो ने पाकिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन करने और सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने के लिए माफी मांगी है तथा सरकार ईंधन और अन्य आपूर्ति को सुरक्षा जांच के बाद यहां से गुजरने की इजाजत देना जारी रखेगी।

नाटो के हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने के बाद पाकिसतान ने अफगानिस्तान में तैनात नाटो फौजों के लिए अपने रास्ते से होने वाली आपूर्ति रोक दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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