अयोध्या फैसला : सभी पक्षकारों ने किया स्वागत

फैसले के बाद वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, "हम सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे। हमारे पास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का उचित कारण है।"जिलानी ने कहा कि हमारे द्वारा पेश किए गए सभी साक्ष्यों पर तवज्जो नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अदालत ने तीन महीने तक पूर्व स्थिति बनाए रखने को कहा है, इसलिए हमें सर्वोच्च न्यायालय जाने की जल्दी नहीं है।
लखनऊ की मुख्य ईदगाह के नायब इमाम और शहर के मशहूर इस्लामी सेमिनरी के प्रमुख मौलाना खालिद रशीद ने फैसले को आंशिक रूप से सकारात्मक और थोड़ा निराशाजनक बताया।शिया संप्रदाय के मौलाना कल्बे जवाद का भी कहना है कि इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फैसले से किसी को तनाव में आने की जरूरत नहीं है, सभी लोग शांति बनाए रखें।
उधर, निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसे किसी खास धर्म की जीत या किसी की हार के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।दास ने संवाददाताओं से कहा, "यह फैसला दुनिया के उन सभी लोगों की जीत है, जो राम में आस्था रखते हैं.. फैसले को किसी धर्म के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।"
रामजन्मभूमि ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास ने गुरुवार को कहा कि फैसले को किसी धर्म की जीत या किसी की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।दास ने कहा, "उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। उसने स्वीकार किया है कि जहां पर फिलहाल राम लला विराजमान हैं, वह भगवान राम का जन्म स्थान है.. यह वाकई में हिंदुओं के लिए खुशी की बात है।"
अयोध्या मामले में पक्षकार मोहम्मद हासिम अंसारी (90) ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इस फैसले पर अंतिम निर्णय सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।अंसारी ने कहा, "मैं अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं। मैं देश के सभी मुसलमानों से अपील करता हूं कि इस निर्णय से परेशान न हों, क्योंकि हमारी लड़ाई अब कठिन हो गई है।"
ज्ञात हो कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया है।अयोध्या मसले पर तीन सदस्यीय खंडपीठ ने फैसले में विवादित जमीन को तीन भागों में बांटने का आदेश देते हुए कहा कि जिस 'विवादित स्थल' पर रामलला की मूर्ति विराजमान है, वहीं पर उनका जन्म हुआ था। इसके अलावा सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए जमीन को रामलला, निर्मोही अखाड़ा और वक्फ बोर्ड के बीच बांटने को कहा।












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