9 साल तक काम करती रही फर्जी महिला चिकित्सक

समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार 37 साल की विनिशा शर्मा ने दांत से जुड़ी बीमारियों के इलाज के जरिए करीब 230,000 पाउंड कमाए हैं। वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) अस्पताल के नियोक्ताओं की आंखों में धूल झोंककर काम करती रही। उसकी फर्जी डिग्री के बारे में नौ साल बाद पता चल पाया।

शर्मा ने 'जनरल डेंटल काउंसिल' (जीडीसी) में पंजीकरण के लिए फर्जी डिग्री का इस्तेमाल किया था। इस दौरान उसने सात अलग-अलग अस्पतालों में काम किया।

भारतीय मूल की महिला का फर्जीवाड़ा उस दौरान सामने आया, जब उसके एक सहयोगी पैट्रिक मैगनिस ने उसकी कुशलता और जानकारी को लेकर सवाल उठाया। मैगनिस ने वर्ष 2003 में उसके सेहत और कार्य पर भी शिकायत की थी।

शर्मा ने हालांकि दावा किया है उसने 'बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी' (बीडीएस) में भारत से डिग्री ली है। महिला ने कहा कि वह अमृतसर में स्थित 'गुरु राम दास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एण्ड रिसर्च' में पढ़ी है।

वॉलवरहैम्पटन क्राउन कोर्ट में बताया गया है कि शर्मा फरवरी 2000 से फरवरी 2009 तक एनएचएस अस्पतालों में काम करती रहीं। उन्होंने मरीजों की जांच किए और छोटे-मोटे ऑपरेशन व वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ आपातकालीन सेवाएं भी दी हैं।

शर्मा ने वर्ष 2007 में डीजीसी में पूर्ण रूप से पंजीकरण की कोशिश की थी।

दन्त चिकित्सक के तौर पर पूरी जानकारी और कुशल न पाए जाने पर शर्मा के पंजीकरण आवेदन को खारिज कर दिया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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