विकास के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ न हो : आल्वा
राज्यपाल ने राज्यों में दैवीय आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रेडक्रास समिति द्वारा प्रशिक्षित 3000 स्वयंसेवियों द्वारा प्रभावितों को राहत व पुनर्वासित करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने दैवीय आपदा के कारण राज्य में व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी बुनियादी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति द्वारा दी गई चुनौतियों का सामना करने के लिए पहाड़ों को हरा-भरा रखना जरूरी है, जिसके लिए विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों के साथ ही स्कूली बच्चों को शामिल कर अभियान चलाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने राज्य की पेयजल समस्या के समाधान के लिए छोटे-छोटे चैक डैम्स निर्माण तथा पर्यावरण की स्वच्छता के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी आवश्यक बताया।
प्रदेश के लिए स्पष्ट नीति पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह बहुत स्पष्ट तथा स्थायी प्रकृति की होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय लोगों की सहभागिता अवश्य सुनिश्चित की जाए। राजधानी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि राज्य का समग्र विकास पर्यटन के विकास से होगा। इस हेतु पर्यटन विकास को एक अभियान के रूप में लेना होगा।
राज्यपाल ने पर्वतीय क्षेत्र में पांचसितारा होटलों के निर्माण की अपेक्षा, पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं देने वाले कम बजट के 'ईको फ्रेंडली' होटल को वरीयता दिये जाने की संस्तुति के साथ ही विपरीत परिस्थितियों में पर्यटकों का ध्यान रखे जाने को पर्यटन विकास के लिए आवश्यक बताया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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