छत्तीसगढ़ बंधक प्रकरण : रिहाई की समयसीमा समाप्त, संकट बरकरार (लीड-1)

एक विश्वस्त सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "प्रशासन ने प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के साथ पिछले दरवाजे से संपर्क स्थापित किया है। राज्य सरकार नक्सलियों के साथ गुप्त बातचीत कर रही है।"

सूत्र ने कहा, "हम नक्सलियों की मांगों पर गौर कर रहे हैं। हमने यह बात नक्सलियों तक पहुंचा दी है कि समयसीमा बढ़ाई जाए। यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हमारे पुलिसकर्मियों पर बंदूक रखकर कोई मांग नहीं मनवाई जा सकती है।"

यद्यपि, प्रदेश सरकार नक्सलियों के साथ बातचीत पर चुप्पी साधे हुए है। सरकार ने फिलहाल इस बात से इंकार किया है कि वह नक्सलियों के साथ कोई बातचीत कर रही है।

सशर्त रिहाई की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही शीर्ष पुलिस अधिकारी इस संकट से उबरने का कोई रास्ता तलाशने के लिए रायपुर में बैठक कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों से आग्रह किया है कि उन्हें अगवा किए गए पुलिसकर्मियों को मानवीय आधार पर रिहा कर देना चाहिए।

नक्सलियों ने 19 सितम्बर को बीजापुर के भोपालपटनम इलाके से सात पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया था। बाद में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई। नक्सलियों ने रविवार शाम अपनी कुछ मांगे रखते हुए शेष चार पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए 48 घंटे की समयसीमा तय कर दी थी। सहायक उपनिरीक्षक सुखराम भगत और कांस्टेबलों में बी.टोपो, नरेंद्र भोसले व सुभाष रात्रे अभी भी नक्सलियों के कब्जे में हैं।

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक आर.एन.दास ने कहा, "पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए जंगल में तलाशी का काम तेज कर दिया गया है। हम नक्सलियों को पकड़ने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।"

दास ने कहा कि पुलिस नक्सलियों का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ले रही है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक विश्व रंजन ने आईएएनएस को बताया, "नक्सलियों की मुख्य मांग ऑपरेशन ग्रीन हंट को बंद करने की है। इसके अलावा कुछ संदिग्ध नक्सलियों की रिहाई की मांग भी की गई है।"

छत्तीसगढ़ सरकार ने दावा किया है कि वह इस संकट से उबरने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के बराबर संपर्क में है। खुफिया जानकारी के अनुसार नक्सली अगवा पुलिसकर्मियों को छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे हैं।

इस बीच अगवा पुलिसकर्मियों के परिजनों ने नक्सलियों से अपने प्रियजनों की रिहाई के लिए गुहार लगाई है। परिजनों ने वादा किया है कि यदि उन्हें रिहा कर दिया जाता है तो वे पुलिस की नौकरी छोड़ देंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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