अयोध्या विवाद : 30 सितम्बर को आएगा फैसला (लीड-2)

प्रधान न्यायाधीश एच. एस. कपाड़िया, न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति के. एस. राधाकृष्णन की पीठ ने सेवानिवृत्त नौकरशाह रमेश चंद्र त्रिपाठी की याचिका को खारिज करते हुए राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसला सुनाने पर गत सप्ताह लगाई गई अंतरिम रोक हटा दी।

पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कपाड़िया ने कहा, "तर्को को विस्तार से सुनने के बाद हमारा मानना है कि याचिका खारिज होने के लायक है।" इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के विशेष कार्याधिकारी हरिशंकर दुबे ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि न्यायमूर्ति एस. वी. खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी. वी. शर्मा की तीन सदस्यीय विशेष पीठ 30 सितम्बर को अपराह्न् 3.30 बजे अपना फैसला सुनाएगी।

सरकार की ओर से अदालत में उपस्थित अटार्नी जनरल जी. वाहनवटी ने कहा, "यदि अदालत के बाहर समझौते की कोई भी गुंजाइश है तो हम उसका स्वागत करेंगे लेकिन साथ ही हम इस मसले पर कोई अनिश्चिता नहीं चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के नाम पर हम सुरक्षा बलों को हमेशा तैनात नहीं रख सकते।"

सर्वोच्च न्यायालय ने 23 सितम्बर को त्रिपाठी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 24 सितम्बर को आने वाले बहुप्रतीक्षित फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।

कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से कहा, "हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। कांग्रेस का पहले से मानना रहा है कि इस मामले का हल आपसी बातचीत से होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर सभी पक्षों को अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए। फिलहाल हम सभी को अदालत के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए।"

भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इससे अनिश्चितता खत्म हुई है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हैं। इससे उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर अनिश्चितता का दौरा खत्म हो गया है। अब उच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा होनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "भाजपा उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर किसी तरह की आशंका या संभावना नहीं जता रही है। फैसला आने के बाद पार्टी इस पर प्रतिक्रिया देगी। हम उम्मीद करते हैं कि देश में शांति बनी रहेगी।"

इस विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मुस्लिम पक्ष के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी ने स्वागत किया है। उन्होंने अयोध्या से आईएएनएस से फोन पर बातचीत में कहा है कि उच्च न्यायालय का फैसला सभी को मंजूर होगा।

अंसारी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का फैसला पूरे देश के लिए राहत लाया है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। इस मामले पर उच्च न्यायलय का फैसला हम सभी को स्वीकार होगा।"

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि इस मामले का निपटारा अब बातचीत से संभव नहीं है। कल्याण ने मंगलवार को एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "सर्वोच्च न्यायायल को पहले भी इस मामले में देर नहीं करनी चाहिए। अब उच्च न्यायालय का फैसला जल्द आना चाहिए। इस मामले को लेकर अनिश्चितता नहीं रहनी चाहिए।"

उन्होंने शाह बानो प्रकरण का हवाला देते हुए कहा, "सरकार को चाहिए कि शाह बानो मामले की तरह संसद में कानून बनाकर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। मेरा मानना है कि इस मामले का हल अब बातचीत से नहीं निकल सकता।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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