समझदार रोबोट तैयार करने में जुटा भारतीय वैज्ञानिक
अमेरिका के कार्नेल विश्वविद्याल में कम्प्यूटर विज्ञान के सहायक प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना ने वर्ष 2004 में कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से बी.टेक. की उपाधि हासिल की है।
सक्सेना ने बताया, "मैं कल्पना करता हूं कि लोग अगले पांच से 10 सालों में अपनी मदद करने वाले रोबोट को खरीद सकेंगे। ये रोबोट कार की कीमत या उससे भी सस्ते होंगे।"
सक्सेना विश्वविद्यालय के पर्सनल रोबोटिक्स प्रयोगशाला के प्रमुख हैं। प्रयोगशाला में जटिल संरचना वाले रोबोट के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किए जाते हैं।
प्रयोगशाला का लक्ष्य ऐसे रोबोट को तैयार करना है, जो घरेलू और कार्यालय के कार्यो को आसानी से निपटा दें। मसलन, ऐसे रोबोट जिन्हें कमरे की साफ-सफाई और बिखरी चीजों को व्यवस्थित करने में मनुष्य की मदद नहीं लेनी होगी।
भारतीय वैज्ञानिक का कहना है कि प्रयोगशाला के समक्ष सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बदले हुए माहौल में रोबोट को समझने की योग्यता विकसित करने की है। अब तक ऐसे रोबोटों का निर्माण हुआ है जो साधारण काम करते आए हैं। जैसे उनके द्वारा किसी वस्तु को उठाना या उन्हें दाहिने की ओर मुड़ना कोई बड़ी बात नहीं है।
उन्होंने बताया कि रोबोट में यह समझ विकसित करना कि किसी चीज को किस तरीके से किया जाना चाहिए, यह महत्वपूर्ण बात है। रोबोट में यह समझ विकसित करने के लिए अब तक काम नहीं हुआ है। वह और उनके छात्र इस काम में जुटे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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