पाकिस्तान को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति चिंताजनक : एंटनी
वाशिंगटन, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने कहा है कि पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर हथियारों की आपूर्ति चिंता का विषय है क्योंकि इसका इस्तेमाल आतंकवाद से लड़ने की बजाय भारत के खिलाफ होता है।
एंटनी की अमेरिकी यात्रा के दौरान बातचीत के एजेंडे में पाकिस्तान को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति और इनके दुरुपयोग के अलावा उच्च तकनीक वाले उपकरणों के निर्यात पर नियंत्रण से जुड़ा मसला भी प्रमुख रहेगा।
उन्होंने रविवार को कहा, "कुल मिलाकर भारत -अमेरिका रक्षा संबंधों में तेजी से प्रगति हो रही है और दोनों देश अपने रिश्ते को मजबूत बना रहे हैं। परंतु ये दो मुद्दे हमारे लिए चिंता का विषय हैं।"
एंटनी अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल जेम्स जोंस और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से मुलाकात करेंगे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं अपनी चिंताओं को जाहिर करूंगा। उच्च तकनीक वाले उपकरणों की निर्यात पर नियंत्रण के मसले पर हम जल्द निवारण चाहते हैं।"
वाशिंगटन में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने एंटनी के लिए स्वागत समारोह का आयोजन किया था जिसमें भारतीय समुदाय के लोगों ने भी शिरकत की। इस मौके पर एंटनी ने कहा, "बातचीत से चमत्कारों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। बातचीत चल रही है। कई चीजों पर बातचीत होनी है।"
एंटनी के साथ रक्षा सचिव प्रदीप कुमार, सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह, अंडमान एंव निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वायर एडमिरल डी. के. जोशी और वायु सेना की महानिदेशक (एयर आपरेशंस) एयर ए. के. गोगोई भी अमेरिका पहुंचे हैं।
रक्षा मंत्री के अनुसार पाकिस्तान को बड़े पैमाने अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, "अमेरिका आतंकवादियों से लड़ने के लिए पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। परंतु यह व्यवहारिक अनुभव की बात है कि इन हथियारों का दुरुपयोग होता है। इन इस्तेमाल भारत के खिलाफ होता है।"
हाल ही में गेट्स ने कहा था कि एंटनी के साथ वार्ता में 126 मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों की खरीदारी से जुड़े 9.11 अरब डॉलर के समझौते पर चर्चा की जाएगी। इस पर एंटनी ने कहा कि विमानों के परीक्षण पूरे होंगे और यह नहीं कहा जा सकता कि यह समझौता किसके साथ होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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