बल्क एसएमएस एवं एमएमएस पर पाबंदी से भारी नुकसान

नई दिल्ली, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फैसला एक सप्ताह टाले जाने के बाद देश भर में बल्क लघु संदेश सेवा (एसएमएस) एवं मल्टी मीडिया सेवाओं (एमएमएस) पर 30 सितम्बर तक लगी पाबंदी के कारण इंटरप्राइज मेसेजिंग सल्यूशन (ईएमएस) संबंधी कंपनियों को प्रतिदिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ईएमएस कंपनियां नेटवर्क एवं कंटेंट प्रोवाइडर्स को वायरलेस एवं मेसेजिंग सल्यूशन उपलब्ध कराती हैं। इससे वे अपने उपभोक्ताओं के संपर्क में रहती हैं।

इसी तरह की एक कंपनी, यूनीसेल टेक्न ॉलॉजी का कहना है कि वह प्रतिदिन 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान उठा रही है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक विनय अग्रवाल ने कहा, "यदि यह स्थिति जारी रही तो हमें 30 सितम्बर तक संभवत: एक करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।"

यूनीसेल लगभग 20 बीपीओ (बिजनेस प्रासेस आउटसोर्सिग) कंपनियों को अपनी सेवाएं देती है और इस पाबंदी के कारण इन कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं को संदेश भेजने के बदले फोन करने के लिए अधिक कर्मचारियों को काम में लगाना पड़ेगा।

अग्रवाल ने कहा, "ढेर सारे महत्वपूर्ण संदेश होते हैं। लेकिन उचित एवं अनुचित दोनों तरह की सामग्रियों पर पाबंदी लगा दी गई है।"

यह कंपनी 500 उद्यमों (उपभोक्ताओं) को अपनी सेवाएं देती है।

सेलुलर आपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने कहा, "यूनीसेल जैसी इंटरप्राइज सल्यूशन कंपनियां भारी नुकसान उठा रही हैं, क्योंकि उनका मुख्य कारोबार बल्क एसएमएस का है। दूरसंचार संचालकों को इस पाबंदी से उतनी दिक्कत नहीं है।" लेकिन दूरसंचार संचालकों के मुनाफे में भी गिरावट आएगी।

मैथ्यू ने कहा, "यद्यपि वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध कराना कठिन होगा, लेकिन इस पाबंदी के कारण उद्योग को लगभग तीन से चार करोड़ रुपये का नुकसान होना चाहिए।"

सीओएआई ने दूरसंचार विभाग से आग्रह किया है कि पाबंदी में ढील दी जाए और ग्राहकों की असुविधा को दूर करने के लिए जरूरी संदेश सेवाओं की अनुमति प्रदान की जाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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