चीन ने कहा माफ़ी मांगे जापान

जापान और चीन के बीच मौजूद 'विवादित क्षेत्र' में चीन की एक नाव को जापान की दो तटरक्षक नावों से टकराने के आरोप में हिरासत में ले लिया गया था. इस मामले को लेकर कई दिनों कर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा. गुरुवार को चीन ने भी चार जापानी नाविकों को अपने कब्ज़े में ले लिया.
चीन ने कहा है कि जापान जिस क्षेत्र को विवादित बता रहा है उसे लेकर कोई विवाद नहीं है. इस घटनाक्रम के चलते दोनों देशों ने मंत्रीमंडलीय स्तर के संपर्क पर भी रोक लगा दी है. दोनों देशों के पर्यटकों ने भी अपनी यात्राओं पर रोक लगा दी है.
इस बीच जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशितो सेनगोकू ने एक समाचार एजेंसी से कहा, ''मुमकिन है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहद खराब हो जाएं और हमें इस बात के संकेत मिल रहे हैं.''
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्ते ज़रूरी हैं और इन्हें बेहतर बनाने के लिए दोनों ही देशों को कूटनीतिक तौर पर कोशिशें करनी होंगी. कब्ज़े में लिए गए चार जापानी नाविकों को चीन ने फ़िलहाल रिहा नहीं किया है.
जानकारों का मानना है कि जापान ने चीन के दबाव के आगे झुकते हुए ये कदम उठाया है. जानकार कहते हैं चीन को लेकर जापान की स्थिति बेहतर नहीं है. उसकी अर्थव्यवस्था चीन के साथ निर्यात पर टिकी है और चीन जापान का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है.
दोनों देशों के बीच इस तनाव के बाद चीन ने जापान को कई महत्वपूर्ण चीज़ों के निर्यात पर रोक लगा दी है. इसका असर जापान के उत्पादन क्षेत्र पर पड़ रहा है. चीन वैश्विक स्तर पर एक मज़बूत अर्थव्यवस्था के रुप में उभर रहा है और जापान पर बनाए गए इस दबाव को उसकी कूटनीतिक महत्वाकांक्षा के रुप में देखा जा रहा है.












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