बीसीसीआई के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गए मोदी (लीड-1)
मोदी ने अदालत को बताया कि अनुशासन समिति से वह निष्पक्ष निष्कर्षो की उम्मीद नहीं करते, क्योंकि अनुशासन समिति के सदस्य उनके खिलाफ जांच का निर्णय लेने में शामिल थे।
इस तीन सदस्यीय अनुशासन समिति में आईपीएल के अंतरिम अध्यक्ष चिरायु अमीन, अरुण जेटली और ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हैं।
मोदी ने अपनी याचिका में बम्बई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत अनुशासन समिति के पुनर्गठन संबंधी उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
ज्ञात हो कि बम्बई उच्च न्यायालय ने 15 जुलाई को मोदी की याचिका खारिज कर दी थी।
मोदी का कहना है कि चूंकि समिति के सदस्य उस निर्णय से बंधे हुए हैं, जिससे उन्होंने सहमति जताई है, लिहाजा वे निष्पक्ष नहीं हो पाएंगे।
उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में मोदी ने अपने निलंबन को चुनौती दी थी और कहा था कि उनके खिलाफ की जा रही जांच निराधार है और दुर्भावना से प्रेरित है।
इस सम्बंध में मोदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने साफ कर दिया था कि समिति में बदलाव की मोदी की मांग नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने हालांकि यह भी कहा था कि अगर मोदी यह मानते हैं कि समिति के कुछ सदस्य उनके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं तो वह इस संबंध में समिति के अंतिम चरण के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
ज्ञात हो कि मोदी के खिलाफ कई सारे आरोपों के लिए जांच की जा रही है। इसमें आईपीएल की फ्रेंचाइजी आवंटित करने में की गई वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं। मोदी पर एक आरोप यह भी है कि उन्होंने आईपीएल की एक फ्रेंचाइजी में छद्म हिस्सेदारी ले रखी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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