इंकार बंद करे भारत : मीरवाइज
मीरवाइज ने अपने आवास पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के नेताओं के एक समूह से कहा, "कश्मीर में बैठे-बैठे हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि भारत के लोग कश्मीर के बारे में कितना अनभिज्ञ हैं.. कश्मीर एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य विवाद है। अब समय आ गया है कि हमें जाग जाना चाहिए।"
मीरवाइज ने भारतीय और पाकिस्तानी संसद में एक कश्मीर समिति गठित करने का सुझाव दिया। यह समिति दशकों पुराने कश्मीर विवाद पर खासतौर से चर्चा करेगी।
मीरवाइज ने खासतौर से कम्युनिस्ट नेता गुरुदास दासगुप्ता को संबोधित करते हुए कहा, "एक शुरुआत होनी चाहिए। कश्मीर एक अंतर्राष्ट्रीय विवाद है और इसे जनता की इच्छाओं के अनुरूप सुलझाया जाना चाहिए।"
मीरवाइज ने कहा कि भारत की जनता और भारतीय नेताओं को आजादी के मुद्दे को सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम भय और आतंक के वातावरण में नहीं जीना चाहते।" मीरवाइज ने 11 जून से जारी हिंसा में मारे गए युवकों की तस्वीरें दिखाई।
मीरवाइज ने कहा, "आप कश्मीर के लोगों पर भारत की इच्छा नहीं थोप सकते। आप इस जोर जबरदस्ती की प्रतिक्रिया देख रहे हैं।"
मीरवाइज ने उन आरोपों से इंकार किया, जिनमें हुर्रियत सदस्यों को पाकिस्तानी एजेंट कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के लोग नई दिल्ली से आर्थिक पैकेज नहीं चाहते।
हुर्रियत नेता ने कहा, "हम भिखारी नहीं हैं.. हम न्याय चाहते हैं.. हम नौकरी नहीं चाहते। कश्मीर में उठ रही असंतोष की आवाजों को नई दिल्ली स्वीकार नहीं रही है। नई दिल्ली लगातार इंकार का रुख अपनाए हुए है।"
दासगुप्ता ने हालांकि कहा कि वह हुर्रियत की आजादी की मांग से तो सहमत नहीं हैं, लेकिन वह मीरवाइज द्वारा सामने रखे गए मुद्दों को संसद में उठाएंगे।
दासगुप्ता ने कहा, "हम यहां न किसी अनादर का बचाव करने आए हैं और न किसी बर्बरता का बचाव करने तथा न कश्मीरियों के साथ की जा रही किसी ज्यादती का समर्थन करने ही। हम विभिन्न राजनीतिक आवाजों को प्रस्तुत करते हैं। हमने यह कभी नहीं माना कि आप पाकिस्तानी एजेंट हैं। आप समान रूप से भारतीय हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications