उप्र के पश्चिमी जिलों में भी बाढ़ का कहर
बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, फरु खाबाद और रामपुर में बाढ़ से बिगड़ते हालात के मद्देनजर प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया है। इन जिलों में भारी बारिश से कुछ स्थानों पर रेलमार्ग डूबने का खतरा मंडरा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान इन जिलों में करीब 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। साथ ही उत्तराखण्ड स्थित कालागढ़ व भमगोड़ा बांध से बड़ी मात्रा में पानी भी छोड़ा गया है।
बिजनौर के अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि कालागढ़ बांध से पानी छोड़े जाने के कारण रामगंगा व उसकी सहयोगी मालन नदी उफान पर आ गई हैं, जिससे निचले इलाकों के करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। उन्होंने कहा कि धामपुर के पास रामगंगा नदी पर बने हरवेली बैराज का एक हिस्सा तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हो जाने से पास के करीब 20 गांव जलमग्न हो गए हैं। सिंह ने कहा कि नेहतौर के पास दिल्ली-हरिद्वार एनएच-74 के पानी में डूबने से मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। अब वाहनों को काशीपुर के रास्ते हरिद्वार भेजा जा रहा है।
उधर रामगंगा नदी का पानी मुरादाबाद कोसी नदी में जाकर मिलने से कोसी भी उफान पर है, जिससे वहां हालात बिगड़ गए हैं।
मुरादाबाद के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि मूढ़ापांडे के पास दिल्ली-लखनऊ एनएच 24 के कोसी नदी के पानी में डूबने से यातायात ठप पड़ गया है। वाहनों को बिलारी कस्बे से रामपुर होते हुए दिल्ली भेजा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरापांडे इलाके के आस-पास के करीब 20 से ज्यादा गांव जलमग्न हुए हैं।
मुरादाबाद और बिजनौर के अलावा रामपुर, बरेली, अमरोहा, शाहजहांपुर और फरु खाबाद में भी रामगंगा व कोसी उफान पर हैं, जिससे इन जिलों के निचले इलाकों के करीब 50 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए हैं। इन जिलों में बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षति स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मायावती ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभवित जिलों में बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत कार्यो में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर लखीमपुर खीरी व बस्ती जिले पहले से घाघरा और शारदा का कहर झेल रहे हैं। यहां बाढ़ से करीब 300 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए और करीब तीन लाख से ज्यादा आबादी बेघर होकर सड़क पर आ गई है।
उत्तराखंड स्थित बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा और शारदा ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है।
गोंडा के अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने कहा कि भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध पर हो रहे कटान को बढ़ने से रोकने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
गत शुक्रवार को घाघरा नदी पर बना 22 किलोमीटर लंबा भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध सुजौली गांव के पास टूट गया था जिससे आस-पास के करीब 50 गांव जलमग्न हो गए थे।
प्रदेश में लगातार बरसात का दौर जारी है। मौसम विभाग ने अगले एक सप्ताह तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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