'ओबामा के भारत दौरे के लिए बड़े मुद्दे की तलाश'
वाशिंगटन, 19 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति बराक ओबामा की नवंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए दोनों देशों के बीच हुए परमाणु समझौते जैसे किसी बड़े मुद्दे की तलाश की जा रही है।
भारतीय पक्ष के नजरिए से वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय को मान्यता दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हेतु अमेरिका का पूर्ण समर्थन, इस दर्जे का कोई मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा उच्च प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग पर निर्यात प्रतिबंध हटाने का मुद्दा भी भारत की प्राथमिकता सूची में होगा।
भारत यह भी चाहेगा कि एच-1 बी एल 1 वीजा शुल्क में भेदभावपूर्ण बढ़ोतरी को लेकर पैदा हुई नई कड़वाहट को भी अमेरिका दूर करे। लेकिन भारत यह भी नहीं चाहेगा कि यह मुद्दा आपसी संबंधों के बीच कोई बड़ा रोड़ा बने, क्योंकि एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने कहा है कि ओबामा की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
ये निष्कर्ष विदेश सचिव निरूपमा राव के दो दिवसीय अमेरिका दौरे के बाद अधिकारियों द्वारा कही गई बातों से उभर कर सामने आए हैं। राव ने अमेरिका प्रवास के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल जेम्स जोन्स और रक्षा एवं वाणिज्य विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ मुलाकात और बातचीत की।
अमेरिका के लिहाज से वाशिंगटन इस बात के लिए उत्सुक है कि स्वाभाविक साझेदार, भारत अमेरिका निर्मित रक्षा उपकरणों की अधिक खरीदारी के लिए, वास्तविक संयुक्त अभ्यास के लिए और भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकारियों के दौरे को गति देने के लिए तीन बुनियादी सैन्य समझौतों पर हस्ताक्षर करे।
इस अधिकारी ने कहा कि इससे अमेरिका इस स्थिति में आ जाएगा कि वह भारत के साथ अगली उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी बांटे, ताकि भविष्य में हथियार प्रणालियों की अंतरसक्रियता सुनिश्चित कराने का भारत का लक्ष्य हासिल हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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