1992 जैसी परिस्थितियां नहीं हैं : जोशी

जोशी ने रविवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हम लोगों में स्पष्ट राय बनी है कि अदालत का निर्णय आने तक कुछ भी नहीं कहना है और न ही कुछ करना है।"

अदालत के फैसले के मद्देनजर 1992 जैसी बन रही कथित स्थिति के बारे में वह कहते हैं, "यह सब मीडिया का दिमागी फितूर है। मीडिया एक माहौल बना रहा है। वातावरण को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है।"

यह पूछे जाने पर कि क्या आडवाणी और उनके सरीखे नेता इस बार परदे के पीछे की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, "परदे के आगे और पीछे क्या होता है। हमें कुछ करने के लिए परदे के आगे-पीछे की जरूरत नहीं है।"

उल्लेखनीय है कि जोशी राम मंदिर आंदोलन के अगुवाओं में शुमार थे। इसी आंदोलन की बदौलत भारतीय राजनीति में उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई। विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही थी कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह मानव संसाधन विकास मंत्री बनाए गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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