अमेरिका ने तिब्बती गोरिल्लाओं को प्रशिक्षण देने की बात मानी
काठमांडू, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी सरकार ने चीनी आक्रमण के खिलाफ 15 साल तक गुरिल्ला युद्ध लड़ने वाले सैकड़ों तिब्बती योद्धाओं की याद में स्मारक का निर्माण कराया है। अमेरिकी सरकार ने माना है कि इन योद्धाओं को प्रशिक्षण उसकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) ने दिया था।
इसके पहले अमेरिका तिब्बती गोरिल्लाओं को प्रशिक्षण देने की बात से इनकार करता रहा है। लेकिन उसने पहली बार इन योद्धाओं की याद में कोलोराडो स्थित प्रशिक्षण स्थल कैंप हेल में स्मारक का निर्माण कराया है। कोलोराडो स्थित प्रशिक्षण स्थल में द्वितीय विश्व युद्द के समय अमेरिका अपनी फौजों को प्रशिक्षण देता था।
वर्ष 1949 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण करने के बाद इस बौद्ध राज्य को अपने में मिला लिया था। उसकी 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' से लड़ने के लिए सीआईए ने कैंप हेल में वर्ष 1957-72 तक करीब दो हजार तिब्बती योद्धाओं को गोरिल्ला युद्ध की बारीकियां सिखाई।
पिछले सप्ताह कैंप हेल में हुए समारोह में सीआईए के सदस्यों, लड़ाई में शामिल तिब्बती गोरिल्लाओं, अमेरिकी वन सेवा के प्रतिनिधियों और तिब्बत-अमेरिकी समुदाय के लोगों ने शिरकत की।
योद्धाओं की याद में स्मृति पटल पर लिखा है, "वर्ष 1958 से 1964 तक कैंप हेल ने तिब्बती स्वतंत्रता सेनानियों को प्रशिक्षित करने में अहम भूमिका निभाई। सीआईए द्वारा प्रशिक्षित इन बहादुर सिपाहियों में से कई गोरिल्लाओं ने स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी। वे अपने समय के सबसे अच्छे और बहादुर लोग थे। यह स्मृति पटल उन्हें समर्पित है।"
इन गुरिल्लाओं को भारत सरकार का भी समर्थन प्राप्त था। इनमें से कुछ नेपाल स्थित मुस्तांग से अपनी गतिविधियां चलाते थे। वहीं, अब अमेरिका द्वारा तिब्बती योद्धाओं को श्रद्धांजलि देने पर चीन को परेशानी होनी तय है। वह मुस्तांग को लेकर भी संदेह में है। उसे लगता है कि यहां से 'स्वतंत्र तिब्बत' के लिए आंदोलन फिर से शुरू हो सकता है। इसी के मद्देनजर उसने नेपाल से लगती सीमा पर गश्त बढ़ा दी है।
इंडो-एशिया न्यूज सर्विस।












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