रिजर्व बैंक ने बढ़ाई दरें, ऋण महंगे होने के आसार (राउंडअप)
गुरुवार को जारी पहली अर्ध तिमाही समीक्षा में आरबीआई ने इस वर्ष पांचवी बार महत्वपूर्ण दरों में वृद्धि की है। रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर छह फीसदी, जबकि रिवर्स रेपो में 50 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे पांच फीसदी कर दिया गया है।
समीक्षा जारी करते हुए आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि देश का आर्थिक विकास स्थिर होने के कारण उच्च महंगाई के साथ औद्योगिक उत्पादन की उच्च दर चिंता का विषय है।
सुब्बाराव ने कहा, "मुद्रास्फीति की दर काफी ऊपर चली गई थी लेकिन कुछ महीने से यह अब भी ऊंची बनी हुई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतें अब भी चिंता का विषय है। अगस्त में इनकी दर 14 फीसदी थी।"
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर सामान्य स्थिति में पांच से साढ़े पांच फीसदी से अब भी काफी ऊपर है। इसलिए मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने वाली मौद्रिक नीतियों को प्रभावी बनाने की जरूरत है।
यह अर्ध तिमाही मौद्रिक समीक्षा ऐसे समय में जारी हुई है जबकि देश के औद्योगिक उत्पादन की दर अगस्त में 13.8 फीसदी और इससे पूर्व के माह में 7.1 फीसदी दर्ज की गई। अगस्त में हालांकि वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 9.78 फीसदी से घटकर 8.51 फीसदी हो गई।
इससे पूर्व की समीक्षा में भी आरबीआई ने बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए थे। उसने दो प्रमुख दरों में वृद्धि कर दी थी जिसके परिणामस्वरूप ऋण और जमा पर ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना जताई गई थी।
रेपो दर वह दर होता है जिस दर पर व्यावसायिक बैंक रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं। इस दर में वृद्धि से व्यावसायिक बैंकों के लिए उधार लेना महंगा हो जाएगा। फलस्वरूप बैंक अपने ग्राहकों के लिए ऋण महंगे कर सकते हैं।
इसी तरह रिवर्स रेपो दर वह दर होती है जिस दर से रिजर्व बैंक, व्यावसायिक बैंकों से उधार लेता है। इस दर में वृद्धि से व्यावसायिक बैंकों के लिए रिजर्व बैंक के पास धन रखना फायदेमंद होगा। इस तरह उनके पास ग्राहकों को ऋण देने के लिए धन की उपलब्धता में कमी आएगी।
सुब्बाराव ने कहा कि इन दरों में वृद्धि से विकास पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
उद्योग जगत ने समीक्षा को लेकर मिली-जुली टिप्पणी की है। एसोसिएटेड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) की अध्यक्ष स्वाति पीरामल ने कहा, "यह संभवत: लगातार उच्च दर पर बनी महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश है।"
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि वर्तमान विकास की दर को बनाए रखने के लिए सस्ते ब्याज दर की जरूरत है और हम आशा करते हैं कि दूसरी तिमाही समीक्षा में आरबीआई इसे ध्यान में रखेगा।
उधर, व्यावसायिक बैंकों ने संकेत दिया है कि इस वृद्धि के असर को ग्राहकों पर डाला जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यकारी निदेशक आर. के. बख्सी ने कहा, "अक्टूबर के शुरू में ब्याज दरों में संशोधन हो सकता है।"
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अध्यक्ष अलेन पेरेरा ने कहा, "ब्याज दर बढ़ सकता है। बैंकों को इस बारे में निर्णय लेना होगा लेकिन 30 सितम्बर तक मैं इसमें कोई परिवर्तन नहीं देख रहा हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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