16 में से 8 प्रधान न्यायाधीश 'भ्रष्ट' थे : पूर्व कानून मंत्री
वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने गुरुवार को दायर किए हलफनामे में कहा है कि छह प्रधान न्यायाधीश 'निश्चित रूप ईमानदार' थे। उन्होंने कहा कि वह शेष दो न्यायाधीशों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
शांति भूषण के बेटे प्रशांत भूषण को एक मामले में अवमानना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस मामले में मुकदमा दायर करने की मांग की थी।
शांति भूषण ने अपने हलफनामे में जिन 16 न्यायाधीशों का जिक्र किया है उनमें न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा, न्यायाधीश के. एन. सिंह, न्यायाधीश एम.एच. केना, न्यायाधीश एल.एम. शर्मा, न्यायाधीश एम.एन. वैंकटचल्लैया, न्यायाधीश ए. एम. अहमदी, न्यायाधीश जे. एस. वर्मा, न्यायाधीश एम.एम. पंछी, न्यायाधीश ए.एस. आनंद, न्यायाधीश एस.पी. बरूचा, न्यायाधीश बी.एन. किरपाल, न्यायाधीश जी.बी. पाठक, न्यायाधीश राजेंद्र बाबू, न्यायाधीश आर.सी. लाहोटी, न्यायाधीश वी.एन. खरे और न्यायाधीश वाई.के. सभरवाल शामिल हैं।
शांति भूषण ने अपने हलफनामे में कहा है कि दो पूर्व प्रधान न्यायाधीशों ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर कहा था कि उनके ठीक पहले और ठीक बाद के न्यायाधीश भ्रष्ट थे। उन्होंने कहा है कि उन चार मुख्य न्यायाधीशों के नाम आठ भ्रष्ट न्यायाधीशों की सूची में शामिल किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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